वक्त की सब बात – Hindi Poem

waqtkisabbaathindipoem

वक्त की सब बात

वक्त की ही तो बात है सब

वरना तू  राजा,मै फकीर क्यू ?

यू तो कुछ ज़िंदगी से गिला नही

जिसको चाहा हमे मिला नही

सपने भी अब बहुत कम आते है

जब आते है दिल  दुखाते  है

अपनो से उमीद ना रख के

खुदा से ही दिल जोड़ लिया

सच मानो यारो हमने

ख़ुद से ही नाता तोड़  लिया

वक्त की ही तो मार है यारो

वरना क्या फरक तुम में और मुझमें

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4 thoughts on “वक्त की सब बात – Hindi Poem”

  1. You actually make it seem so easy with your presentation but I find this topic to be actually one thing that I feel I would never understand. It sort of feels too complicated and very vast for me. I am having a look ahead in your next publish, I’ll attempt to get the grasp of it!

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