कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ४

अभी तक आपने पढ़ा की कैसे नीरज और चित्रा मिले, कैसे उन्हें प्यार हुआ और जब उनके परिवार वालो को पता चला तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई | अब पढ़िए आगे की कहानी

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कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग २ पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ३ पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

चित्रा के घर वालो को पता लगने के बाद जैसे चित्रा पर दुखो का पहाड़ गिर पड़ा | चित्रा जहा सबकी चहेती थी वहीं सबकी नफरत की शिकार होने लगी | सभी लोग उसे कोसते और ताने मारते पर चित्रा का हौसला इससे बिलकुल भी नहीं टूटता था वो अपने निश्चय पर दृढ़ थी और किसी की बात पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ता था | समय बीत रहा था पर उसके परिवार पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा था की चित्रा पर क्या बीत रही है उधर नीरज दूसरी नौकरी में व्यस्त हो गया था क्योकि उसके ऊपर पूरे परिवार की जिमीदारी भी थी | उसका भाई भी अब उम्र में काफी बड़ा हो गया था पर दिमाग से आज भी वैसा ही था इस लिए नीरज को उसपर विशेष ध्यान देना पड़ता था |
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बदलते वक़्त के साथ बदले राखी मनाने का तरीका

रक्षाबंधन त्योहार भाई बहन के प्यार का प्रतिक है | दुनिया समय के साथ कितनी भी बदल जाए मगर भाई बहन का प्यार आज भी वो ही है | आज भी भाई बहन लड़ते है, बहस करते है मगर एक दुसरे का साथ भी देते है | आज के दिन बहन भाई कितने भी दूर हो मगर राखी के लिए वे एक दुसरे से मिलने जरुर आते है | अगर भाई बहन में कोई लड़ाई भी हो तो आज के दिन सब कुछ भूल के वे मिलते है और उनका खोया हुआ प्यार भी वापिस आ जाता है | Continue reading “बदलते वक़्त के साथ बदले राखी मनाने का तरीका”

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कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग २

अभी तक आपने पढ़ा नीरज के बारे में, उसके परिवार के बारे में, और उसके स्वभाव और काम के बारे में, अब पढ़िए इस कहानी के अगले किरदार यानि की उस लड़की के बारे में जो नीरज से जुड़ी हुई है |

भाग -१ को पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

उस लड़की का नाम था चित्रा सिंह | चित्रा एक जमीदार परिवार में जन्मी थी जो पैसे में काफी संपन्न थे और उसके पिता भोला सिंह एक प्रसिद्ध व्यापारी भी थे | चित्रा के पिता एक बहुत ही कट्टर परिवार के जमीदार थे और आन मान और शान के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे | चित्रा की माँ तुलसी देवी बहुत ही सात्विक स्वाभाव की थी | घरेलु काम में माहिर होने के साथ साथ वो सामाजिक कार्यो में भी काफी दिलचस्पी रखती थी | चित्रा की एक बहन भी थी जिसका नाम था आतिया सिंह वो चित्रा से २ साल बड़ी थी और एक भाई था रमेश सिंह जो चित्रा से ५ साल बड़ा था | Continue reading “कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग २”

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Happy International Women’s Day

INTERNATIONAL WOMEN’S DAY (IWD) 2017

Today is your day “Women”. Feel the uniqueness in you. Be bold for coming change. Without Women, this world will not survive. Truthofthoughts.com salute and respect all the “Women” and wishing you all “Happy Women’s Day”.

A beautiful woman draws strength from troubles,

 Smiles during distress and grows stronger with prayers. Continue reading “Happy International Women’s Day”

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भाई दूज का त्योहार

भाई दूज का त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है। यह त्योहार दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है।
हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक दो त्योहार मनाये जाते हैं – एक रक्षाबंधन जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसमें भाई बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है। दूसरा त्योहार, ‘भाई दूज’ का होता है। इसमें बहनें भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है। Continue reading “भाई दूज का त्योहार”

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History of Raksha Bandhan

The Bond of love between sisters and brothers is celebrated on the occasion of Raksha Bandhan in India. On this day sister ties a thread around her brother’s wrist as a symbol of protection while the he promises to protect and take care of her. Raksha Bandhan falls on the day of the full moon. On this occasion all family members cherish the love of sisters and brothers. On this occasion brothers offer gifts to their sisters just to make her happy. Sisters show their love to brothers by tieing attractive piece of thread (Rakhi). It is also known as Rakhi Poornima or Rakhi

Raksha Bandhan – History

  • There were different stories behind Raksha Bandhan occasion but the famous one is Rani Karnavati of Chittorgarh and Mughal King Humayun. Chittorgarh was once attacked by Bahadur Shah and it was not possible for widowed Rani Karnavati to save her empire from the mighty force of Bahadur Shah. She sent a rakhi to Humayun and pleaded to save her and the empire. Overcome by emotions, Humayun, along with his force, immediately rushed to Chittorgarh to protect the queen. Though he could not save Karnavati as she and all other womenfolk there had committed suicide before he could reach, Humayun fought against Bahadur Shah and saved Chittorgarh from his invasion. Later, he handed over the empire to Karnavati’s son Vikramjeet Singh.
  • It is believed that once Lord Krishna cut his finger and was bleeding profusely. Seeing this, Draupadi tore a part of her sari and tied it around his finger. This is believed to be the reason why he saved her during hercheerharanby Kaurava.
  • Rakhi saved Alexander The Great’s life. When he had invaded India, his wife Roxana had sent a rakhi to the Katoch King Porus and he had vowed to protect her and her husband. So, on the battlefield when he was about to kill Alexander he saw the rakhi and refrained from killing him.

 

Source – International business times, DNS

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