Hindi Poem – हर इंसान अलग

सोच अलग व्यवहार अलग,

ज़ीने का अंदाज़ अलग

कुछ अलग है हम सब में,

फिर भी एक से दिखते है Continue reading “Hindi Poem – हर इंसान अलग”

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दर्द की नई पह्चान

अपनो  को  छोड़ गैरो  में आई  मै

गैरो को अपना समझा बहुत  पछ्ताई   मै

मेरे दर्द में भी दर्द ना दिखे

एसी  जगह  है ये  मेरे  लिए

मांग  भरते  ही दुनिया  का रंग दिखने लगा

सिक्के के दो पहलू का हर ढंग दिखने लगा

माँ के स्पर्श को तरस  सी गए मै

सर पे कोई हाथ फेरे, बिखर सी गई मै

अस्तिव के टुकडें दुर तक जा गिरे  है

कही दिल तो कही जहन  घायल पड़े  है

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