तुलसी विवाह – Story and Importance of Tulsi vivah

Tulsi Shaligram Vivah Story in Hindi

तुलसी विवाह कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी में मनाया जाता है | इस दिन की मानता है कि आज ही के दिन भगवान विष्णु और तुलसी माता का विवाह हुआ था | तुलसी विवाह की पूरी कथा पद्मा पुराण में है | तुलसी का दूसरा नाम वृंदा भी है | तुलसी माता भगवान विष्णु को बहुत प्रिय थी |
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धनतेरस : आरोग्य जीवन का आशीर्वाद

आए जाने कैसे करे धन्वंतरी भगवान की पूजा 

धनतेरस एक ऐसा त्योहार है जो दिवाली से पहले आता है और पूरे देश में बहुत जोर शोर से मनाया जाता है | धनतेरस का बहुत ही महत्व है | धनतेरस के दिन ख़ास धन के लिए और आरोग्य जीवन पाने के लिए भक्त भगवान की पूजा करते है | इस दिन भगवान धनवंतरी को पूजा जाता है | आज के दिन लोग भगवान की पूजा के साथ साथ नए बर्तन खरीदते है और कई लोग आज के दिन सोना चांदी भी खरीदते है | ऐसा माना जाता है कि आज के दिन सोना चांदी खरीदना शुभ होता है | सब लोग परिवार के साथ शौपिंग का आनंद लेते है |

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दुर्गा पूजा का महत्त्व – Durga Puja

बुराई पर अच्छाई की जीत

दुर्गा पूजा भारत में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है | खास कर के बंगाल और कोलकाता का दुर्गा पूजा सबसे बड़ा त्योहार है | दुर्गा पूजा को मनाने की तिथियाँ हिन्दू पंचांग के अनुसार निकाली जाती है | दुर्गा पूजा का त्योहार दुर्गा माँ की बुराई के प्रतीक राक्षस महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। दुर्गा पूजा कई राज्यों असम, बिहार, झारखण्ड, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा, और पश्चिम बंगाल  में मनाया जाता है | बंगाली हिन्दू और आसामी हिन्दुओं का बाहुल्य वाले क्षेत्रों पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा में यह वर्ष का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है।  धीरे धीरे अब दुर्गा पूजा पुरे भारत देश में मनाई जाती है | दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई का प्रतिक है | नारी शक्ति के सम्मान के लिए भी दुर्गा पूजा मनाई जाती है | |  दुर्गा पूजा आने से एक महीने पहले से ही इस त्योहार की तैयारियां शुरू हो जाती है | कई तरीके के पंडाल सजाए जाते है | जगह जगह अलग अलग तरीके से इस त्योहार को मनाया जाता है | कही कल्चर एक्टिविटी होती है तो कही नाच गाना होता है | सभी माँ दुर्गा के भजनों में खोए होते है| सभी मंदिर बहुत ही सुंदर सजाए जाते है | Continue reading “दुर्गा पूजा का महत्त्व – Durga Puja”

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नौ दिन बस माँ के साथ – आओ मनाए नवरात्रि साथ

दुर्गा माँ के नौ रूप  – माँ को पसंद है ये नौ भोग

नवरात्रि भारत में हर घर में बहुत ख़ुशी और पूजा पाठ के साथ मनाई जाती है | नवरात्रि के नौ दिन जैसे भगतो के लिए उपहार के दिन होते है | इन नौ दिनों में हर घर से बस माँ की जय जय कार ही सुनाई देती है | नवरात्रि के नौ दिन देवी माँ को पूजा जाता है और नौ दिन उपवास रखा जाता है| नवरात्रि के उपवास में अन्न नहीं खाया जाता| नवरात्रि में दुर्गा माँ के नौ रूपों का पूजन होता है| नवरात्रि के हर एक दिन में माँ दुर्गा के एक रूप की आराधना होती है और उस दिन उस रूप के मन पसंद चीजों का ही भोग लगता है | सभी माँ की भक्ति में डूबे होते है | नवरात्रि के एक दिन पहले से सब घरो में मंदिर की सफाई होती है | माँ को नए जोड़े में सजाया जाता है | आए जाने माँ के नौ रूपों के बारे में | आए जाने, नवरात्रि में किस दिन किस चीज़ का भोग लगाने से आप पर हो सकती है माँ की कृपा | Continue reading “नौ दिन बस माँ के साथ – आओ मनाए नवरात्रि साथ”

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जन्माष्टमी – अच्छाई की शुरुआत

जन्माष्टमी  (Janmashtmi)

हिन्दू धर्म के अनुसार ये माना जाता है कि जब जब इस धरती में पाप बढेगा तब तब इस धरती में देवता जन्म लेंगे उस पाप को दूर करने के लिए | ये भारत देश का सोभाग्या ही था कि श्री कृष्ण ने इस धरती में जन्म लिया और श्री कृष्ण के जन्म से ये धरती पावन हो गई | श्री कृष्ण ने अपने कई रूप दुनिया को दिखाए और उन के सभी रूपों से पूरी दुनिया मोहित हो गई | चाहे वो एक नटखट पुत्र या फिर एक प्यारा प्रेमी या फिर भाई भाई का अटूट प्यार, श्री कृष्ण ने हर रूप, हर रिश्ते को बह्खुबी निभाया | श्री कृष्ण ने मस्ती भी करी और माँ यशोदा का प्यार भी पाया, भाई से मनमानी भी करी और भाई की आज्ञा का पालन भी करा | गोपियों का दिल भी लगाया और उनका सम्मान भी किया | हर रूप में श्री कृष्ण की जय जय कार हुई| बिना किसी स्वार्थ से हर किसी के साथ रिश्ता निभाया और दुनिया से बुराई को दूर किया | जन्माष्टमी श्री कृष्ण के जन्म की ख़ुशी में पूरे भारत में बहुत ही ख़ुशी से मनाई जाती है | आए जाने क्या कहानी है जन्माष्टमी के पीछे | Continue reading “जन्माष्टमी – अच्छाई की शुरुआत”

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कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ४

अभी तक आपने पढ़ा की कैसे नीरज और चित्रा मिले, कैसे उन्हें प्यार हुआ और जब उनके परिवार वालो को पता चला तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई | अब पढ़िए आगे की कहानी

कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग १ पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग २ पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ३ पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

चित्रा के घर वालो को पता लगने के बाद जैसे चित्रा पर दुखो का पहाड़ गिर पड़ा | चित्रा जहा सबकी चहेती थी वहीं सबकी नफरत की शिकार होने लगी | सभी लोग उसे कोसते और ताने मारते पर चित्रा का हौसला इससे बिलकुल भी नहीं टूटता था वो अपने निश्चय पर दृढ़ थी और किसी की बात पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ता था | समय बीत रहा था पर उसके परिवार पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा था की चित्रा पर क्या बीत रही है उधर नीरज दूसरी नौकरी में व्यस्त हो गया था क्योकि उसके ऊपर पूरे परिवार की जिमीदारी भी थी | उसका भाई भी अब उम्र में काफी बड़ा हो गया था पर दिमाग से आज भी वैसा ही था इस लिए नीरज को उसपर विशेष ध्यान देना पड़ता था |
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बदलते वक़्त के साथ बदले राखी मनाने का तरीका

रक्षाबंधन त्योहार भाई बहन के प्यार का प्रतिक है | दुनिया समय के साथ कितनी भी बदल जाए मगर भाई बहन का प्यार आज भी वो ही है | आज भी भाई बहन लड़ते है, बहस करते है मगर एक दुसरे का साथ भी देते है | आज के दिन बहन भाई कितने भी दूर हो मगर राखी के लिए वे एक दुसरे से मिलने जरुर आते है | अगर भाई बहन में कोई लड़ाई भी हो तो आज के दिन सब कुछ भूल के वे मिलते है और उनका खोया हुआ प्यार भी वापिस आ जाता है | Continue reading “बदलते वक़्त के साथ बदले राखी मनाने का तरीका”

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कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ३

यह कहानी है एक ऐसे बुजुर्ग जोड़े की जो बचपन से साथ खेले और बड़े होते होते एक दुसरे के प्यार में पड़ गए पर भाग्य को कुछ और ही मंज़ूर था और वो बिछड़ गए और बुढ़ापे में फिर से मिले | इसमें अभी तक आप ने पढ़ा कि नीरज और चित्रा के स्वाभाव और उनके परिवार के और उनके बीच के रिश्ते और फर्क के बारे में , अब पढ़िए आगे के क्या हुआ जब चित्रा ने नीरज को अपने कमरे से निकाल दिया|

यहाँ पढ़े कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग 1

यहाँ पढ़े कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग 2

चित्रा के निकालने पर नीरज बिलकुल हिल सा गया था उसे गरीब-अमीर का फर्क समझ आ गया था, उसी दिन नीरज ने ठान लिया कि वो अब और मेहनत करेगा और अमीर बनकर रहेगा | उस दिन की बात तो नीरज अपने मन में रख लिया और किसी को नहीं बताया पर उसी दिन से उसने काम पर और ध्यान देने लगा और खूब मेहनत करने लगा | Continue reading “कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ३”

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Holi Special Sweets Recipies

होली (Holi) रंगों का त्यौहार है होली (Holi) खुब मस्ती और धुम्धाम से मनाई जाती है बच्चो में तो इस का ख़ास excitement देखा जाता है  होली पर विशेषकर गुजिया (Gujiya), ठंडाई (thanthai) सब खुब पसंद करते है लोग एक दुसरे के घर जा के एक दुसरे को रंग लगाते है और एक दुसरे को मिठाई खिलाते है बच्चा party तो मिठाई को खाने की ताक पे होते है. इस होली आप सब भी अपने को घर मिठाई की खुश्बू  से महकाए. आप सब के लिये गुजिया(Gujiya), चन्द्रकला गुजिया(Chandrakala Gujiya) और ठंडाई (thanthai)की recipes.  Continue reading “Holi Special Sweets Recipies”

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Celebration of Holi – होली का मह्त्व

होली (Holi) – Celebration of Holi

होली (Holi) भारत में धूम धाम से मनाई जाती है। होली (Holi) रंगों के त्यौहार है। होली (Holi) फाल्गुन महीने में पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है।मथुरा की होली सबसे जयादा famous है। होली मनाने का तरीका हर जगह का भले अलग अलग होता है मगर मस्ती हर जगह छाई होती है हर कोए रंगों में रंगा होता है घरों से पकवनो और मिठाई की खुशबु आती है हर घर मस्ती से भरपुर होता है। भारत के अन्य festival की तरह होली (Holi) भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली से राजा हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है। Continue reading “Celebration of Holi – होली का मह्त्व”

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भाई दूज का त्योहार

भाई दूज का त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है। यह त्योहार दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है।
हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक दो त्योहार मनाये जाते हैं – एक रक्षाबंधन जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसमें भाई बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है। दूसरा त्योहार, ‘भाई दूज’ का होता है। इसमें बहनें भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है। Continue reading “भाई दूज का त्योहार”

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Happy Diwali – Stories & Celebration

Happy Diwali : The brightest festival among all the Hindu festival is Diwali. Diwali is a festival of light. This year Diwali falls on 30 October 2016(Sunday). Happiness and joy are all around the country. Everyone enjoy Diwali with family, friends, and relatives. On Diwali, people meet their families and near & dear one. Every Hindu family celebrates Diwali with love.
Diwali is celebrated as a day on which Lord Rama returned to his Kingdom Ayodhya after 14 years of exile, in which he put an end to the demon Ravana of Lanka, who was a great Pundit, highly learned but still evil dominated his mind. After this victory of Good over Evil, Rama returned to Ayodhya. In Ayodhya, the people welcomed them by lighting rows of clay lamps. So, it is an occasion in honor of Rama’s victory over Ravana; of Truth’s victory over Evil. Continue reading “Happy Diwali – Stories & Celebration”

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Story behind Dhanteras – Happy Dhanteras

Dhanteras is a most celebrated festival in India. Dhanteras festival falls in the month of Kartik(Oct-Nov) on the thirteenth day of the dark fortnight. Two days before Diwali, Dhanteras is celebrated. In India, on Dhanteras, Lakshmi – the Goddess of wealth – is worshiped to provide prosperity and happiness. As the word itself explains, Dhan means wealth and ‘Tera’ means 13th. People are celebrating Dhanteras by lighting a lamp in evening. Dhan – Lakshmi is welcomed into the house. Some families are also making Rangoli in front of the door just to welcome the Goddess Lakshmi. Aartis are sung and fruits and sweets are offered to her. On Dhanteras Lord Kuber is also worshiped by Hindu. This custom of worshiping Lakshmi and Kuber together is in the prospect of doubling the benefits of such prayers.
People flock to the jewelers and buy gold or silver jewelry or utensils to venerate the occasion of Dhanteras.
There is a belief that on Dhanteras buying new clothes, Gold and silver are very good and it will increase the wealth and prosperity. New things which are purchase on Dhanteras will get 13 times growth over a year.

Story behind the Dhanteras

There was a story that the 16- year old son of King Hima. His horoscope predicted his death by snake-bite on the fourth day of his marriage. On that particular day, his newly-wed wife did not allow him to sleep. She laid out all her ornaments and lots of gold and silver coins in a heap at the entrance of the sleeping chamber and lit lamps all over the place. Then she narrated stories and sang songs to keep her husband from falling asleep.
The next day, when Yama, the god of Death, arrived at the prince’s doorstep in the guise of a Serpent, his eyes were dazzled and blinded by the brilliance of the lamps and the jewelry. Yam could not enter the Prince’s chamber, so he climbed on top of the heap of gold coins and sat there the entire night listening to the stories and songs. In the morning, he silently went away.
Thus, the young prince was saved from the clutches of death by the cleverness of his new bride, and the day came to be celebrated as Dhanteras. And the following days came to be called Naraka Chaturdashi (‘Naraka’ means hell and Chaturdashi mean 14th). It is also known as ‘Yamadeepdaan’ as the ladies of the house light earthen lamps or ‘deep’ and these are kept burning throughout the night glorifying Yama, the god of Death. Since this is the night before Diwali, it is also called ‘Chhhoti Diwali’ or Diwali minor.

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History of Raksha Bandhan

The Bond of love between sisters and brothers is celebrated on the occasion of Raksha Bandhan in India. On this day sister ties a thread around her brother’s wrist as a symbol of protection while the he promises to protect and take care of her. Raksha Bandhan falls on the day of the full moon. On this occasion all family members cherish the love of sisters and brothers. On this occasion brothers offer gifts to their sisters just to make her happy. Sisters show their love to brothers by tieing attractive piece of thread (Rakhi). It is also known as Rakhi Poornima or Rakhi

Raksha Bandhan – History

  • There were different stories behind Raksha Bandhan occasion but the famous one is Rani Karnavati of Chittorgarh and Mughal King Humayun. Chittorgarh was once attacked by Bahadur Shah and it was not possible for widowed Rani Karnavati to save her empire from the mighty force of Bahadur Shah. She sent a rakhi to Humayun and pleaded to save her and the empire. Overcome by emotions, Humayun, along with his force, immediately rushed to Chittorgarh to protect the queen. Though he could not save Karnavati as she and all other womenfolk there had committed suicide before he could reach, Humayun fought against Bahadur Shah and saved Chittorgarh from his invasion. Later, he handed over the empire to Karnavati’s son Vikramjeet Singh.
  • It is believed that once Lord Krishna cut his finger and was bleeding profusely. Seeing this, Draupadi tore a part of her sari and tied it around his finger. This is believed to be the reason why he saved her during hercheerharanby Kaurava.
  • Rakhi saved Alexander The Great’s life. When he had invaded India, his wife Roxana had sent a rakhi to the Katoch King Porus and he had vowed to protect her and her husband. So, on the battlefield when he was about to kill Alexander he saw the rakhi and refrained from killing him.

 

Source – International business times, DNS

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