ओशो के अनमोल वचन

“सत्य को जानने की दिशा में पहला जो बड़ा काम है,

वह शब्दों को,शास्त्रों को,संप्रदायो को छोड़ देना है,

जो इन्हें जितने जोर से पकड़ेगा, उतना ही मुश्किल हो जाएगा,

उसे जानना , जो है”

Continue reading ”   ओशो के अनमोल वचन”

Sharing is caring! Share the post to your loved ones

सन्यास को अपनाए, अपराध ना बनाए – ओशो

Osho – Meditation & Sanyas

ओशो का संन्यास के बारे में अलग ही सोच विचार रहा है | ध्यान के बिना आप आंतरिक शांति नहीं पा सकते और सन्यास भी जीवन के लिए बहुत जरुरी है | ओशो ये अच्छे से जानते थे कि बदलते वक़्त के साथ बदलना भी जरुरी है वरना सन्यास नाम कही इस दुनिया में खो ना जाए | ओशो हमेशा से ही पारम्परिक सन्यास और सन्यासियों के खिआफ थे | ओशो ने दुनिया को सन्यास का सही अर्थ समझाया – ओशो कहते है कि सन्यास मानवता की आत्मा है | उसे बचाया ही जाना चाहिए | अब सन्यास को नए रूप में आना होगा | सन्यास को पूरी दुनिया में फैलाना है | संसार में उसकी जड़े होगी और उसकी सुवास आकाश में फैलेगी | ओशो ने सन्यास देना शुरू किया और उन्होंने सबसे पहले सन्यास दिया “माँ आनन्द मधु” को 24 सितम्बर 1970 में | Continue reading “सन्यास को अपनाए, अपराध ना बनाए – ओशो”

Sharing is caring! Share the post to your loved ones

Birthday special on OSHO : Some truth about him

Birthday special on OSHO : Some truth about him

ओशो एक ऐसा नाम है जिसने जहां एक ओर सम्पूर्ण विश्व के रहस्यवादियों, दार्शनिकों और धार्मिक विचारधाराओं को नया अर्थ दिया। आध्यात्म और संन्यास की नई परिभाषा गढ़ी। ओशो फिलॉसफी के टीचर थे वो अपने विचारों से धर्म को चुनौती देते हैं।

मध्य प्रदेश के गांव कुछवाड़ा में 11 दिसंबर को जन्मे ओशो का पारिवारिक नाम रजनीश चंद्र मोहन था। 1975 में ओशो संस्कृत के लेक्चरर के तौर पर रायपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाने लगे। वहां उनके विचारों को युवाओं के लिए अच्छा न मानते हुए उनका ट्रांसफर कर दिया गया। जिसके बाद अगले ही साल उन्होंने जबलपुर यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रवक्ता के रूप में काम करना शुरू कर दिया। Continue reading “Birthday special on OSHO : Some truth about him”

Sharing is caring! Share the post to your loved ones