कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग ३

यह कहानी है एक ऐसे बुजुर्ग जोड़े की जो बचपन से साथ खेले और बड़े होते होते एक दुसरे के प्यार में पड़ गए पर भाग्य को कुछ और ही मंज़ूर था और वो बिछड़ गए और बुढ़ापे में फिर से मिले | इसमें अभी तक आप ने पढ़ा कि नीरज और चित्रा के स्वाभाव और उनके परिवार के और उनके बीच के रिश्ते और फर्क के बारे में , अब पढ़िए आगे के क्या हुआ जब चित्रा ने नीरज को अपने कमरे से निकाल दिया|

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चित्रा के निकालने पर नीरज बिलकुल हिल सा गया था उसे गरीब-अमीर का फर्क समझ आ गया था, उसी दिन नीरज ने ठान लिया कि वो अब और मेहनत करेगा और अमीर बनकर रहेगा | उस दिन की बात तो नीरज अपने मन में रख लिया और किसी को नहीं बताया पर उसी दिन से उसने काम पर और ध्यान देने लगा और खूब मेहनत करने लगा |

एक दिन चित्रा के पिता भोला सिंह को पता चला की उसके दोस्त का बेटा नीरज बहुत ही मेहेनती और इमानदार लड़का है और इसी कारण से उसने उसे अपने घर बुलाया कुछ बात करने को,नाथू इस बात से बहुत चिंतित हो गया के आखिर भोला ने नीरज को क्यों बुलाया है, और वो भी नीरज के साथ भोला के घर चला गया| वहाँ पहुचते ही भोला और नाथू हाथ मिलाये और इधर – उधर की बाते करने लगे की तभी चित्रा वहाँ आ गई और वो नीरज को देखते ही बोली, तुम फिर आ गए यहाँ और तभी भोला और नाथू दोनों चुप हो गए और चित्रा से भोला ने पूछा क्या तुम दोनों एक दुसरे को जानते हो, तो चिता ने बड़े ही टेढ़े मुह से बोला मैं क्यों जानू ऐसे लोगो को जो मुँह उठाए कही भी चले आते है | यह सुनते ही भोला उसपर नाराज़ हो गया और उसे डांट कर अन्दर भेज दिया | भोला इस बात से बहुत शर्मिंदा हुआ और नाथू से माफ़ी मांगी| नाथू ने बोला कोई बात नहीं बच्ची ही तो है और थोड़ी देर शांत रहने के बात पूछा कि तुमने नीरज को यहाँ क्यों बुलाया |

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भोला ने बोला की मैंने तुम्हारे बेटे के काम की बहुत तारीफ सुनी है और इसी लिए मै चाहता हूँ कि वो हमारे साथ काम करे | यह सुन कर नाथू बहुत खुश हो गया क्योकि नाथू बहुत ही गरीब था और भोला बहुत ही अमीर, अगर नीरज भोला के साथ काम करता तो उनकी गरीबी कम होती और नीरज को सीखने का भी मौका मिलता | नाथू ने तुरंत हाँ करदी और नीरज से भी नहीं पूछा |

वहाँ से आने के बाद नीरज ने अपने पिता से पूछा कि आपने बिना मुझसे पूछे उन्हें हाँ क्यों करी, मुझे वहाँ काम नहीं करना, मुझे अपने हिसाब से काम करना है, मुझे किसी की मेहेरबानी की जरुरत नहीं है | यह सब सुन नाथू ने बोला मै जानता हूँ की तुम पढ़ना चाहते हो और बड़े आदमी बनना चाहते हो पर बेटा मै इतना अमीर नहीं की तुम्हे पढ़ा सकू और न ही घर की ऐसी हालत है की मै तुम्हे कह सकू की खुद पढ़लो, हमारे घर को तुम्हारी जरुरत है बेटा और अगर तुम कमाओगे तो पूरे परिवार का भला होगा, इसी लिए मैंने वहाँ हाँ करदी | पिता की इन दुःख भरी बातो को सुन नीरज कुछ बोल नहीं पाया और भोला के साथ काम करने के लिए राजी हो गया |

अगली ही सुबह नीरज भोला के घर गया और बोला के मुझे आपसे कुछ बात करनी है, भोला चकित होकर बोला , बोलो बेटा क्या बात है, नीरज बोला साहब मै आपके लिए काम करने को तैयार हूँ पर मुझे पढ़ने का शौक है अगर हो सके तो, मुझे कुछ वक्त रोज़ पढ़ने को मिल जाए तो आपकी बड़ी कृपा होगी, भोला को ये बात अच्छी लगी और वो तुरंत राजी हो गया| भोला ने सोचा के उसका बेटा जादा पढ़ा लिखा नहीं है और काम काज नहीं संभाल पाता अगर यह कुछ संभाल ले तो उसका काम कुछ हल्का हो जाए |

अगले ही दिन नीरज काम पर लग गया, 14 साल की छोटी सी उम्र में ही वो काफी काम करने लगा था और साथ ही साथ पढ़ भी रहा था , इसी बीच भोला ने चित्रा की पढ़ाई देखने का जिम्मा भी नीरज को ही दे दिया और नीरज ही कई बार चित्रा को पढ़ाता और समझाता | समय बीतते चित्रा और नीरज में भी पटने लगी और चित्रा अब उसको उल्टा नहीं बोलती बल्कि उसके साथ खेलती भी थी, और बहुत सारा वक्त उसके साथ बिताती |

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वक्त बीता और चित्रा 21 साल की हो गई और नीरज अब 23 साल का हो गया था और भोला का सारा काम अब वही संभालता था, भोला आँख बंद करके नीरज पर भरोसा करता और उसे सब बताता, भोला का बेटा रमेश, नीरज से बहुत चिढ़ता था क्योकि नीरज ने सारा काम संभाला हुआ था जो रमेश का था और उसका पिता भी उससे जादा नीरज पर भरोसा करता था |

नीरज और चित्रा साथ – साथ बड़े हुए और इसी कारण वो एक दुसरे को कब पसंद करने लगे उन्हें खुद पता नहीं चला, चित्रा तो काफी पहले ही नीरज को दिल दे चुकी थी पर उसने कभी नीरज को नहीं बताया| पर समय के साथ नीरज को भी यह एहसास हो गया के चित्रा उसे पसंद करती है और एक दिन नीरज ने चित्रा के सामने अपने प्यार का इज़हार कर दिया| नीरज और चित्रा का प्यार अब आसमान पर था पर समाज की वजह से उन्होंने कभी जाहिर नहीं होने दिया|

एक दिन चित्रा के लिए भोला के पास रिश्ता आया और उसने ये बात अपने घर पर बताई, सभी बहुत खुश हुए और शादी तय करने की बात घर पर चलने लगी के तभी चित्रा ने अपने और नीरज के बारे में घर वालो को बता दिया|

रमेश सिंह इस बात का फायदा उठा कर तुरंत ही भड़क गया और बोला देखिए पिताजी आपने उसपर इतना विश्वास किया और उसने कैसे आपसे विश्वास घात किया | उसी समय उसने नीरज को घर से निकाल दिया और भोला सिंह कुछ नहीं बोला | रमेश समझ गया की यही मौका है नीरज को अपने बाप की नज़रो से गिराने का, और इसी कारण नीरज की सारी कमियाँ जो रमेश को मालूम थी वो भोला के सामने लाता गया और उसका कान भरता रहा नीरज के खिलाफ|

आलम यह हुआ के कुछ दिनों के बाद भोला नीरज से इतनी नफरत करने लगा की उसे देखना भी मंजूर नहीं करता था और उसी घुस्से में उसने सारा काम अपने बेटे रमेश को दे दिया | रमेश तो शुरू से ही यही चाहता था पर अब नीरज और चित्रा की जिंदगी बदल सी गई थी | नीरज को जहा काम से निकाल दिया गया था जिससे उसको घर चलाना और मुश्किल हो गया था, वही चित्रा को घर से बहार निकलने भी नहीं दिया जाता था , नीरज से मिलना तो बहुत दूर की बात थी | चित्रा बहुत उदास रहने लगी और घर में किसी से बोलना भी बंद कर दिया , चित्रा की ये उदासी उसकी माँ से देखी नहीं जा रही थी और इसी लिए उसने तय किया की वो भोला से बात करेगी चित्रा और नीरज की शादी के बारे में | जब तुलसी देवी भोला से बात करने पहुची तभी चित्रा भी छुप कर उनकी बात सुनने लगी |

तुलसी ने भोला को समझाया की नीरज बहुत ही अच्छा लड़का है और वो चित्रा को खुश रखेगा तो भोला ने जात और औकात की बात करके उसकी बात काट दी और वहाँ से घुस्से में चला गया | चित्रा ने जब यह सब सुना तो वह और भी दुखी हो गई और घुस्से में आ गई और खाना -पीना सब छोड़ दी , यह सब देख कर उसकी माँ और दुखी हो गई और उनको दिल का दौरा पड़ गया , जल्दी जल्दी में उनको हॉस्पिटल ले जाया गया , डॉक्टर ने उनकी हालत काफी नाज़ुक बताई| डॉक्टर की बाते सुनकर चित्रा बहुत चिंतित हो गई और उसने अपनी माँ से बोला की अगर वो कहे तो वह नीरज को छोर देगी बस आप जल्दी ठीक हो जाइये | पर अगले ही दिन तुलसी देवी चल बसी |

तुलसी के जाने के बाद भोला और कठोर हो गया और चित्रा को घर में कैद कर दिया | चित्रा को कुछ समझ नहीं आ रहा था और उसने फैसला किया की वो या तो नीरज से शादी करेगी या सारी ज़िन्दगी शादी नहीं करेगी | भोला भी घुस्से में बोल दिया की मत कर शादी पर मै नीरज से तेरी शादी नहीं होने दूंगा |

जब ये सब बात नीरज को पता चली तो वो चित्रा के पास संदेसा भिजवाया की अगर चित्रा शादी नहीं करेगी तो वो भी नहीं करेगा और सारी ज़िन्दगी कुवारा रहेगा | चित्रा ने नीरज को बहुत समझाया पर वो नहीं माना |

वक्त बीतता गया और देखते देखते नीरज की सभी बहनों की शादी हो गई इसी बीच नीरज की बुवा और दादा दोनों भी भगवान को प्यारे हो गए | नीरज अब सिर्फ काम में ध्यान देता था और अपने पिता और माता के साथ रहता था |

यह थी अब तक की कहानी अब हम आपको अगले भाग में बताएँगे की कैसे नीरज और चित्रा बिछड़ गए और कैसे उसके बाद मिले बुढ़ापे में| तब तक सभी का ख्याल रखे और कुछ भी गलत न होने दे अपने आस पास… धन्यवाद |

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