कहानी एक बुजुर्ग जोड़े की -भाग २

अभी तक आपने पढ़ा नीरज के बारे में, उसके परिवार के बारे में, और उसके स्वभाव और काम के बारे में, अब पढ़िए इस कहानी के अगले किरदार यानि की उस लड़की के बारे में जो नीरज से जुड़ी हुई है |

भाग -१ को पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

उस लड़की का नाम था चित्रा सिंह | चित्रा एक जमीदार परिवार में जन्मी थी जो पैसे में काफी संपन्न थे और उसके पिता भोला सिंह एक प्रसिद्ध व्यापारी भी थे | चित्रा के पिता एक बहुत ही कट्टर परिवार के जमीदार थे और आन मान और शान के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते थे | चित्रा की माँ तुलसी देवी बहुत ही सात्विक स्वाभाव की थी | घरेलु काम में माहिर होने के साथ साथ वो सामाजिक कार्यो में भी काफी दिलचस्पी रखती थी | चित्रा की एक बहन भी थी जिसका नाम था आतिया सिंह वो चित्रा से २ साल बड़ी थी और एक भाई था रमेश सिंह जो चित्रा से ५ साल बड़ा था |

चित्रा घर में सबसे छोटी होने के कारण सबकी लाडली थी और इसी वजह से उसकी बहन आतिया उससे बहुत प्यार करती थी और उसकी सारी ख्वाहिशे पूरी किया करती थी | चित्रा पढ़ने में बहुत ही तेज़ थी और खेल में भी सबसे आगे रहती थी |

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आइये कहानी को आगे बढ़ाते हुए बताते है के कैसे चित्रा और नीरज पहली बार मिले…

नीरज के पिताजी नाथू मल्ल की जहा दुकान थी उसी के पास ही चित्रा के पिता का ढाबा भी था और अक्सर नाथू मल्ल और भोला सिंह की मुलाकात होती रहती थी | कभी नाथू भोला के ढाबे पर जाता तो कभी किसी काम से भोला नाथू के पास साइकिल बनवाने आते , ऐसे ही देखते देखते दोनों की दोस्ती हो गई और वे बहुत ही घनिष्ठ मित्र बन गए , और उनकी मित्रता इतनी बढ़ गई की वो एक दुसरे के घर आने जाने लगे |

एक बार की बात है जब चित्रा ११ साल की हुई तो उसके पिता भोला सिंह ने उसके जन्मदिन पर सभी को दावत दी और इसके साथ ही उसने नाथू और उसके पूरे परिवार को भी दावत दी | नाथू क्योकि एक बहुत ही गरीब परिवार से था तो उसको वहाँ जाना बड़ा अटपटा लग रहा था पर भोला के बार बार बोलने पर वो उसे मना नहीं कर पाया और वहा अपने बेटे नीरज और पत्नी को लेकर चला गया |

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वहा जाते ही नीरज खो सा गया | नीरज ने वो सब देखा जो वो सपने में भी नहीं सोच सकता था | भोला के घर पर कार, घोड़े, रेडियो सब कुछ था , उसका घर एक आलिशान महल की तरह था जो दिखने में बहुत ही खुबसूरत और कीमती था | नीरज उस घर में जैसे खो सा गया और घूमते घूमते एक कमरे में चला गया |

उस कमरे में एक से एक महंगे खिलोने और सामान रखे थे , उनसब सामान को नीरज देख ही रहा था की तभी चित्रा आ गई और नीरज को बोली तुम कौन हो और तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई के तुम मेरे कमरे में बिना पूछे घुस आए,नीरज जब तक कुछ समझता उससे पहले ही चित्रा उस पर बरस पड़ी, नीरज ने जवाब में सिर्फ इतना ही कहा था कि मै तो सिर्फ यहाँ देख रहा था कि तब तक चित्रा बोल पड़ी कि अपनी औकात देखी है बड़ा आया मेरा कमरा देखने वाला, और दुत्कारते हुए और धकेलते हुए नीरज को कमरे से निकाल दिया|

नीरज चित्रा के व्यवहार से बहुत दुखी हो गया था, आज तक उसने ऐसी लड़की नहीं देखी थी जो इतनी बदतमीज़ हो | चित्रा का ऐसा व्यवहार इसलिए हो गया था क्योकि चित्रा शुरू से बड़े प्यार में पली थी और सबसे छोटी होने के कारण सब उसकी बात मानते थे इसी लिए वो बिगड़ती चली गई और अपना कोई भी सामान किसी को छूने नहीं देती थी ना ही किसी की कोई बात सुनती थी, उसकी माँ बहुत समझाती पर चित्रा एक न सुनती, यहाँ तक कि वो अपने भाई बहन को भी अपना सामान नहीं छूने देती और ना ही कमरे में किसी को घुसने देती इसीलिए जब उसदिन नीरज को अपने कमरे में देखी तो उसपर भड़क पड़ी |

ये थी चित्रा और नीरज की पहली मुलाक़ात | अब अगले भाग में पढ़िए की क्या हुआ जब चित्रा ने नीरज को कमरे से निकाला और फिर क्या हुआ जो वे अच्छे दोस्त बन गए| तब तक सभी का ख्याल रखे और कुछ भी गलत न होने दे अपने आस पास… धन्यवाद |

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