इंसानियत को दो मान – Hindi poem

poem on humanity

रंग से ना करो प्यार, वो इक दिन ढल जाएगा

इंसानियत को दो मान, वो ही तुम्हारे काम आएगा |

धर्म अधर्म से दूर होके, इंसानियत का दिया जलाओ यारो

बुरे समय में,  इन्सान ही इन्सान के काम आएगा |

आग लगाना भी अच्छा है, अगर अहंकार को लगा सको

आंसू बहाना भी अच्छा है, अगर पश्चाताप के बहा सको |

जरुर पढ़े ये कविता  : हर इंसान अलग  

झूक जाना भी अच्छा है, अगर रिश्ता बचा सको

अपनों में अपनापन नापने से पहले, जरा खुद की भी जांच करो |

दुसरो से आस रखने से पहले, खुद की काबिलियत की तलाश करो

जरुर पढ़े ये कविता : कदम बढ़ाते मंजिल की ओर 

आस आस ही रह जाएगी, इक दिन काश हो जाएगी

कल के इंतज़ार से पहले, आज की कीमत का ख्याल करो |

 

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