सन्यास को अपनाए, अपराध ना बनाए – ओशो

osho

Osho – Meditation & Sanyas

ओशो का संन्यास के बारे में अलग ही सोच विचार रहा है | ध्यान के बिना आप आंतरिक शांति नहीं पा सकते और सन्यास भी जीवन के लिए बहुत जरुरी है | ओशो ये अच्छे से जानते थे कि बदलते वक़्त के साथ बदलना भी जरुरी है वरना सन्यास नाम कही इस दुनिया में खो ना जाए | ओशो हमेशा से ही पारम्परिक सन्यास और सन्यासियों के खिआफ थे | ओशो ने दुनिया को सन्यास का सही अर्थ समझाया – ओशो कहते है कि सन्यास मानवता की आत्मा है | उसे बचाया ही जाना चाहिए | अब सन्यास को नए रूप में आना होगा | सन्यास को पूरी दुनिया में फैलाना है | संसार में उसकी जड़े होगी और उसकी सुवास आकाश में फैलेगी | ओशो ने सन्यास देना शुरू किया और उन्होंने सबसे पहले सन्यास दिया “माँ आनन्द मधु” को 24 सितम्बर 1970 में |

Osho – Sanyas

सन्यास का अर्थ – ओशो

ओशो के अनुसार सन्यासी किसी धर्म का नहीं, सिर्फ धर्म का है | सन्यासी चाहे मंदिर में ठहरे या फिर मस्जिद में, कुरान पढ़े या गीता | जिस में भी सन्यासी का प्रेम हो, करे | लेकिन सन्यासी को सदा ये याद रहना चाहिए कि उसका प्रेम दूसरो के किलाफ घृणा का कारण ना बने बल्कि प्रेम को अपनी सीडी बनाए और अनन्त तक जाए जहा सब एक हो जाता है |

“करते हुए अकर्ता हो जाना,

करते हुए भी ऐसे हो जाना ,

जैसे मै करने वाला नहीं हु

ये ही सन्यास का लक्ष्ण है”

सन्यासी का लक्ष्ण होता है, हर चीज़ में अकर्ता हो जाना | सन्यास जीवन को देखने का और ही ढंग सिखाता है | सन्यासी और गृहस्थी में घर का फर्क नहीं है बस ढंग का फर्क है, दोनों में जगह का फर्क नहीं है बस भाव का फर्क है |

जरुर पढ़े : बुद्धत्व को जानो -ओशो

सन्यासी जहा है वाही रहे, कही भागे ना | क्युकी भागते वो लोग है जो भयभीत होते है | जो संसार को झेलने में भयभीत है वो परमात्मा को नहीं झेल पाएगा | जो संसार का ही सामना करने में डर रहा है वो क्या परमात्मा का सामना कर पाएगा ? संसार जैसी कमजोर चीज़ ही जब उसे डरा देती है तो जब परमात्मा उसके सामने आएँगे तब वो कैसे संभाल पाएगा | जीवन जहा है अगर वही सन्यासी हो गए फिर तो भागना ही नहीं है | अगर सन्यासी संसार को छोड़ते है या अपने परिवार को छोड़ते है तो ध्यान रखे भविष्य में संन्यास कही अपराध ना बन जाए | चीन में कोई सन्यासी हो कर नहीं रह सकता क्युकी उनका मान ना है जो कमाए गा, वो ही खाएगा | चीन में बहुत गहरी परम्परा थी संन्यास की | बिखर गई ! तिब्बत में सबसे ज्यादा प्रयोग संन्यास में हुए थे लेकिन सब मिटटी हो गया |

जरुर पढ़े : Stories by Osho & Zen

सन्यास को बचाने के उपाय – ओशो

ओशो के अनुसार सन्यास एक ही तरह बच सकता है | सन्यासी अगर स्वनिर्भर हो जाए | किसी और पर निर्भर ना हो, ना समाज पर और ना परिवार पर | संसार से भागे ना | अपने परिवार में ही रह कर, अपने गृहस्थ जीवन को संभाल कर, सन्यासी जीवन को जीए | इसी से हम सन्यास को भविष्य के लिए बचा पाएंगे | ओशो ने संन्यास के लिए सिर्फ एक ही अनिवर्यता राखी है वो है “ध्यान” | बाकी कोई वर्त नियम नहीं है | क्युकी जो भी वर्त नियम ऊपर से थोपे जाते है वो पाखण्ड का निर्माण कर देते है | ध्यान के अतिरिक्त सन्यासी के लिए और कोई अनिवार्यता नहीं है |

जरुर पढ़े : Motherhood – Osho

सन्यासी जो गैरिक रंग के कपडे पहनते है वो बस उन्हें हर पल याद दिलाने के लिए है कि वे सन्यासी है | गैरिक वस्त्र मतलब अग्नि के रंग का वस्त्र | भीतर भी ज्ञान की अग्नि जलानी है, उसमे सब जला डालना है | भीतर भी ध्यान का यज्ञ जलाना है |

ध्यान – ओशो

ध्यान का अर्थ है, जीवन में गहनतम की संवेदना | जीवन में जो रहस्यमय है उसकी संवेदना | ओशो के अनुसार जो आँखों से दिखाई नही पड़ता अगर वह भी दिखाई देने लगे – तो ध्यान | जो कान से सुनाई नहीं पड़ता पर वह भी तुम सुन पाए – तो ध्यान | जो हाथ से नहीं छुआ जा सकता, उसका भी स्पर्श होने लगे – तो ध्यान | ध्यान सारी संवेदना का सार निचोड़ है |  ओशो कहते है कि मै चाहता हु कि तुम्हारा जीवन संवेदनशील हो, गहन संवेदना से भरा हो | और इसी सारी संवेदना के बीच में ध्यान की संवेदना पैदा होती है | ध्यान परम संवेदना का नाम है | जब तुम्हारी सारी इन्द्रिया अपनी समग्रता में, अपनी परिपूर्णता में सक्रिय होती है, जागरूक होती है तो उन्ही सब के बीच में एक नया फूल खिलता है, जिसका तुम्हे अब तक कोई भी पता नहीं था मगर उसी भूमिका में वह फूल खिलता है – वह है ध्यान |  ओशो कहते है –

“भीतर तुम्हारी आत्मा का सान्न हो जाए, उसको ही मै ध्यान कहता हु,

भीतर तुम स्व्च्छ हो जाओ, उसी को मै स्वास्थ्य कहता हु,

भीतर तुम आन्न्द्मगन हो जाओ, उत्सव आ जाए,

दीये ही दीये जल जाए, फूल ही फूल खिल जाए,

तो तुमने जाना, तुमने जीया, तुमने पहचाना,

उसको मै सन्यास कहता हू”

Sharing is caring! Share the post to your loved ones

Leave a Reply

Your email address will not be published.