कार्ल मार्क्स – मार्क्सवाद

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कार्ल मार्क्स

कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818, जर्मनी में हुआ था | कार्ल मार्क्स दुनिया के सबसे प्रभावशाली दार्शनिक और समाजवादी कार्यकर्त्ता  के रूप में जाने जाते है | कार्ल मार्क्स जर्मनी में जन्मे थे पर मृत्यु के समय वह ब्रिटिश नागरिक थे | कार्ल मार्क्स के पिता हिर्सचेल पेशे से वकील थे | कार्ल मार्क्स के परिवार ने 1824 में ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था और कार्ल मार्क्स के पिता का नाम हिर्सचेल मार्क्स से बदल कर हैंनरिच मार्क्स हो गया था | कार्ल मार्क्स की माता का नाम हेनरीएत्ता प्रेस्सबुर्ग था | हैंनरिच मार्क्स  और हेनरीएत्ता प्रेस्सबुर्ग के चार बच्चे थे – कलर मार्क्स, सोफी, एमिली और लुइस |

कलर मार्क्स का बचपन  

कलर मार्क्स का बचपन बहुत ही मस्ती भरा था | उनके अंदर शानदार प्राक्रतिक गुण थे जिसकी वजह से उनके पिता का मानना था कि वे एक दिन इंसानियत का पाठ पूरी दुनिया को सिखाएँगे | कलर मार्क्स की माँ उन्हें सौभाग्यशाली मानती थी क्योंकि उनके हाथ में दिया गया हर काम बहुत ही अच्छे से होता था | कलर मार्क्स के पिता हैंनरिच मार्क्स की माँ की मृत्यु जब हुई उसके बाद हैंनरिच मार्क्स के पिता ने अपने पुरे परिवार के साथ इसाई धर्म अपना लिया था | हैंनरिच मार्क्स ने ऐसा धर्म अपनाया जिसमे इंसानियत का पाठ सिखाया जाता है जिसकी वजह से कार्ल मार्क्स ने अपने स्कूल के समय पर ही इंसानियत धर्म के बारे में सुनना शुरू कर दिया था | कार्ल मार्क्स अपने स्कूल में किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे | स्कूल के बाद कार्ल मार्क्स ने बोन विश्वविद्यालय में दाखिला लिया कानून की पढाई करने के लिए | कॉलेज में कार्ल मार्क्स ने बहुत दोस्त बनाए और उस समय कार्ल मार्क्स काफी कर्ज में डूब गए थे जब उनके पिता को कर्जे के बारे में पता चला तब उन्होंने उसके सरे कर्जे चुका दिए पर साथ में ही उनके पिता ने कार्ल मार्क्स के साथ एक शर्त रखी कि उनको इस कॉलेज को छोड़ के दूसरे कॉलेज में जाना होगा | फिर कार्ल मार्क्स बर्लिन विश्वविद्यालय में गए | वहा जाके कार्ल मार्क्स में बदलाव आया और उन्होंने पढाई में बहु मेहनत करी | कार्ल मार्क्स को वहा एक प्रोफेसर मिले ब्रूनो बौएर (Bruno Bauer) जिन्होंने कार्ल मार्क्स को जी.डब्ल्यू.ऍफ़. हेगेल की लिखी हुई कई थ्योरी के बारे में बताया | कार्ल मार्क्स जी.डब्ल्यू.ऍफ़. हेगेल की लिखी हुई थ्योरी से काफी प्रभावित हुए |

कार्ल मार्क्स के प्यार की शुरुआत  

जब कार्ल मार्क्स बोन विश्वविद्यालय में थे तब उन्होंने काफी दोस्त बनाए थे | उसी समय उनके प्यार की कहानी की शुरुआत हुई थी | कार्ल मार्क्स का दिल उनकी बचपन की दोस्त जेन्नी वोन वेस्टफलेन जो की कार्ल मार्क्स की बहन सोफी की दोस्त थी, उन पर आ गया था | दोनों एक दुसरे से बहुत प्यार करते थे | जेन्नी चार साल बड़ी थी कार्ल मार्क्स से | जेन्नी बहुत ही सुंदर और बहुत ही बड़े परिवार से थी, जेन्नी के पिता उसकी शादी बहुत अच्छी जगह करवा सकते थे मगर फिर भी जेन्नी ने कार्ल मार्क्स को ही अपना जीवन साथी चुना | जेन्नी से शादी करने के बाद दोनों के 6 बच्चे हुए और उनमे से सिर्फ तीन बच्चे ही जीवित रह पाए जेन्नी, लौरा और एलेअनोर |

 कार्ल मार्क्स के जीवन का उतार चड़ाव

1838 में कार्ल मार्क्स के पिता की मृत्यु हो गई थी अब कार्ल मार्क्स को अपने जीवन का खर्चा खुद चलाना था | इसीलिए कार्ल मार्क्स ने जब अपनी शोध पूरा किया तब उन्होंने सोचा कि उनके मेंटर ब्रूनो बौएर उनकी मदद कर पाएंगे टीचिंग पोस्ट पाने के लिए पर तब तक ब्रूनो बौएर को उनके खुल कर बोलने की वजह से 1842 में कॉलेज से निकाल दिया गया और वो कार्ल मार्क्स की कोई मदद नहीं कर पाए |फिर कार्ल मार्क्स ने पत्रकारिता में अपना भविष्य आज़माया पर बहुत से एडिटर्स ने उनके लिखे articles उनके उग्र राजनीतिक सोच की वजह से छापने से मना कर दिया | फिर कार्ल मार्क्स कोलोग्ने चले गए, तब कोलोग्ने में लिबरल ओप्पोसिशन मूवमेंट चल रहा था जिसे कोलोन सर्किल के नाम से जाना जाता था, इस ग्रुप का अपना अखबार था “The Rhenish Gazette” | इस अख़बार ने कार्ल मार्क्स के article को प्रकाशित किया था | ये ग्रुप कार्ल मार्क्स के article से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कार्ल मार्क्स को अक्टूबर 1842 में अपने अख़बार का editor बना दिया था | कोलोग्ने में कार्ल मार्क्स की मुलाकात मोसेस हेस्स से हुई जो की समाजवादी था | उससे मिलने के बाद से कार्ल मार्क्स समाजवादी कार्यक्रम में जाने लगे | इन कार्यक्रमो से कार्ल मार्क्स को जो भी जानकारी मिली उस जानकारी के आधार पर उन्होंने एक article लिखा जो की मोसेल वाइन किसानो की गरीबी के ऊपर था, ये article सरकार के विरुद्ध था | इसीलिए जैसी ही ये article प्रकाशित हुआ वैसे ही ये अख़बार जनवरी 1843 में सरकार ने बंद कर दिया | इसके बाद कार्ल मार्क्स की गिरफ्तारी भी तय थी तब कार्ल मार्क्स ने अपनी गर्ल फ्रेंड जेन्नी के साथ शादी करी और दोनों पेरिस चले गए |

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पेरिस में कार्ल मार्क्स को दुसरे अख़बार फ्रांको – जर्मन अन्नाल्स (Franco – German Annals) में editor की पोस्ट का ऑफर मिला | पेरिस में मार्क्स ने नौकरीपेशा लोगो से मिलना शुरू किया | कार्ल मार्क्स नौकरीपेशा लोगो की गरीबी देख के हैरान थे वही साथ ही साथ उन लोगो के दोस्ती वाले स्वभाव को देख कर खुश |  एक समय में कलर मार्क्स बहुत बड़ी समाजवादी क्रान्तिकारी लाए थे | 1848 के क्रांति के एक साल पहले ही कार्ल मार्क्स ने साम्यवादी घोषणापत्र लिखा था जिसमे 19 वी सदी में होने वाले बदलावों के बारे में विशेष बताया था | हालाकि कार्ल मार्क्स ने समाजवादी क्रांति की शुरुआत नहीं की थी मगर बाद में कार्ल मार्क्स इस क्रांति में उभर के आगे आए थे | कार्ल मार्क्स की दी गई थ्योरीयो को मार्क्सवादी (Marxism) कहा जाने लगा | कार्ल मार्क्स अपनी महत्वपूर्ण सोच के कारण पेरिस, ब्रुसेल्स और लंदनः में जाने जाने लगे |

कार्ल मार्क्स को उनके दोस्त एंगेल्स ने आर्थिक रूप से सारी मदद प्रदान करी |  1864 में लंदन में ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ’ की स्थापना में मार्क्स ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संघ की सभी घोषणाएँ, नीतिश् और कार्यक्रम मार्क्स द्वारा ही तैयार किये जाते थे। कोई एक वर्ष तक संघ का कार्य सुचारू रूप से चलता रहा, किंतु बाकुनिन के अराजकतावादी आंदोलन, फ्रांसीसी जर्मन युद्ध और पेरिस कम्यूनों के चलते ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ’ भंग हो गया। किंतु उसकी प्रवृति और चेतना अनेक देशों में समाजवादी और श्रमिक पार्टियों के अस्तित्व के कारण कायम रही।   कार्ल मार्क्स की काफी गहरी दोस्ती हो गई थी एंगेल्स से | कार्ल मार्क्स और एंगेल्स दोनों ने मिल कर काम करने का फैसला लिया | जब दोनों अपने पहले आर्टिकल पर काम कर रहे तब एक बड़े परिवार ने फ्रेंच सरकार पर दबाव डाला कि मार्क्स को देश से बहार कर दिया जाए | मार्क्स के क्रांति भरे विचार कुछ लोगो को रास नहीं आते थे | 25 जनवरी 1845, मार्क्स को सरकार की तरफ से ऑडर मिल गया कि मार्क्स को फ्रेंच से बाहार निकाला जा रहा है | कार्ल मार्क्स और एंगेल्स दोनों ने बेल्जियम जाने का फैसला किया क्युकी उस देश में अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता बाकि देशो से ज्यादा थी | मार्क्स ब्रुसेल्स में रहने लगे | मार्क्स के दोस्त फ्राइड रिच एंगेल्स ने उसकी आर्थिक रूप से बहुत मदद की ताकि मार्क्स को गहरा अध्यन करने का समय मिल सके | मार्क्स अपने विचारो से दुनिया को बदलने की कोशिश में था |

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मार्क्स की अलग सोच उनके जीते जी ज्यादा लोग समझ नहीं पाए | ब्रुसेल्स में मार्क्स “The German Ideology” की नाम की किताब पर काम कर रहे थे जिसमे इन्सान के किये हुए काम को ज्यादा महत्व देने की बात कर रहे थे | लेकिन मार्क्स को कोई भी पब्लिशर नहीं मिल रहा था जो इसे प्रकाशित करे | 1846 जनवरी में मार्क्स ने साम्यवादी समानता समिति का निर्माण किया जिसका उद्देश्य था सभी समाजवादी सोच के लोगो को एक साथ करके समाज में क्लास सिस्टम छोड़ के समानता की भावना लाना | मार्क्स के इस सोच से प्रभावित होके इंग्लैंड के समाजवादी सोच वाले लोगो ने मिल कर एक सम्मलेन लंदन में किया जहा उन्होंने एक संगठन “साम्यवादी संघ” बनाया | ब्रुसेल्स में मार्क्स ने इस संघ की एक ब्रांच बनाई और दिसम्बर 1847 में “साम्यवादी संघ” की मीटिंग जो की लंदन में हुई थी उसमे मार्क्स ने उस संघ के उद्देश्य को तय किया | ब्रुसेल्स में वापिस आके मार्क्स ने लिखने में ध्यान दिया तब मार्क्स साम्यवादी घोषणापत्र लिख रहे थे | इसका पहला ड्राफ्ट एंगेल्स ने लिखा था जिसका नाम “साम्यवाद के सिध्दांत” था | मार्क्स ने इस पर ओर काम किया और ये साम्यवादी घोषणापत्र फरवरी 1848 में प्रकाशित हुआ | उसके अगले ही महीने, सरकार ने मार्क्स को बेल्जियम से निकाल दिया | कार्ल मार्क्स और एंगेल्स दोनों ही कोलोग्ने चले गए, वहा मार्क्स ने पुलिस के अत्याचार के खिलाफ एक नया संघ बनाया जिसका उद्देश्य था लोगो को बड़े प्राधिकारी के अत्याचार से बचाना | नए The Rhenish Gazette अख़बार में लगातार क्रांतिकारी विचार प्रकाशित कर रहे थे | तब पूरे देश में क्रांति की लहर दोड़ रही थी | मार्क्स का कहना था कि विकास-क्रम में वर्ग-भेद मिट जाने के बाद राजनीतिक सत्ता यानी एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग के उत्पीड़न की संगठित शक्ति का खात्मा हो जायेगा। जब शोषक पूँजीपति वर्ग ही नहीं रह जायेगा तो क्रान्ति द्वारा उसकी सत्ता पलटने वाला सर्वहारा एक वर्ग के रूप में अपने प्रभुत्व का अपने आप ख़ात्मा कर देगा। और तब वर्ग विरोधों से बिंधे समाज की जगह एक ऐसे संघ की स्थापना होगी जिसमें व्यष्टि (एक) की स्वतन्त्र प्रगति समष्टि (सब) की स्वतन्त्र प्रगति की शर्त होगी। कम्युनिस्ट अपने विचारों और उद्देश्यों को छिपाना अपनी शान के खिलाफ़ समझते हैं। वे खुले आम एलान करते हैं कि उनके लक्ष्य समूची वर्तमान व्यवस्था को बलपूर्वक उलटने से ही सिद्ध होंगे। कम्युनिस्ट क्रान्ति के भय से शासक वर्ग काँपते हैं, तो काँपते रहें। सर्वहारा के पास खोने के लिये अपनी बेड़ियों के सिवाय कुछ भी नहीं, जीतने के लिये सारी दुनिया है। दुनिया के मज़दूरो, एक हो!

9,मई 1849, मार्क्स को फिर देश से बाहर निकल जाने को कहा | जाते जाते मार्क्स ने 18 मई को नए The Rhenish Gazette अख़बार में एक लेख प्रकाशित किया जिसमे लिखा था कि उसे देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है मगर उसकी सोच हर जगह फैलेगी और तब तक फैलेगी जब तक श्रमिक वर्ग से मुक्ति नहीं मिल जाती | कई देशो से निकालने के बाद आखिर में मार्क्स इंग्लंड में रहने लगे | वहा मार्क्स के परिवार को काफी गरीबी में रहना पड़ा | 1852 में चार्ल्स दाना जो की एक समाजवादी कार्यकर्ता थे, मार्क्स को नौकरी ऑफर करते है कि मार्क्स उनके अखबार के लिए लिखे “The NewYork Tribune” | दस सालो में इस अखबार ने 487 लेख मार्क्स के प्रकाशित किये जिसमे से 125 लेख एंगेल्स ने लिखे थे | अब मार्क्स की आर्थिक स्थिति काफी ठीक हो गई थी | मार्क्स को अब न्यू अमेरिकन साइक्लोपेडिया में लेख लिखने का ऑफर मिला | मार्क्स अब इसके लिए लेख लिखने लगे | 1860 में The NewYork Tribune बंद हो गया | अब फिर से मार्क्स के परिवार को गरीबी का सामना करना पड़ा | इतनी परेशानियों के बावजूद मार्क्स लिखते रहे |

1867 में कार्ल मार्क्स ने दास कपिटल (द कैपिटल, हिंदी में पूंजी शीर्षक से प्रगति प्रकाशन मास्‍को से चार भागों में) का पहला भाग प्रकाशित किया था | इस किताब में समाजवादी विचारो के बारे में गहराई से लिखा गया था जैसे मजदूरों को अधिशेश मूल्य मिलना चाहिए, श्रम का विभाजन आदि | दास कापिटल के आखिरी भाग में मार्क्स ने लिखा है कि पूंजीवाद खुद अपने बनाए हुए कानून के कारण नष्ट हो जाएगा | पूंजीवादी लोगो का अत्याचार बड गया है और , श्रमिक वर्ग का उत्पीड़न भी बड गया है | मार्क्स का कहना था कि अब श्रमिक वर्ग एक हो जाएंगे और पूंजीवाद को खत्म कर देंगे | मार्क्स ने दास कपिटल के दुसरे भाग के लिए लिखना शुरू कर दिया था | मार्च 1871 में पेरिस ग्रामसंस्था की स्थापना हुई | मार्क्स के लिए ये बहुत बड़ी जीत थी, इस संघ की वजह लुयिस नेपोलियम को राज्य त्याग करना पड़ा था | लेकिन बाद में ये संघ को भंग कर दिया गया और सरकार ने 30,000 काम्युनर्ड की हत्या कर दी थी | इस सब की वजह से कार्ल मार्क्स काफी निराश हो गए थे | उन्होंने अपना काम करना फिर शुरू कर दिया मगर अब मार्क्स उतनी तेज़ी से काम नहीं कर पाते थे | 1881 कार्ल मार्क्स और जेन्नी दोनों बीमार थे | 2 दिसम्बर 1881 जेनी की मृत्यु हो गई | जनवरी 1883 को कार्ल मार्क्स बड़ी बेटी कैंसर की वजह इस दुनिया को अलविदा कर गई | ठीक दो महीने बाद, कार्ल मार्क्स की मृत्यु 14 मार्च 1883 को हो गई | बाद में कार्ल मार्क्स ने दास कपिटल के तीन भाग एंगेल्स के साथ प्रकाशित किये | बाद के दो भाग एंगेल्स ने कार्ल मार्क्स के खुद के लिखे हुए लेख से प्रकाशित किए |

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