कन्या पूजन में क्यों एक लड़के का होना जरुरी है – नवरात्रि

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कन्या पूजन

भारत में नवरात्रि में चारो तरफ बस माँ की जय जय कार होती है | हर घर में माँ दुर्गा के नौ रूप की पूजा की जाती है | ऐसा माना जाता है कि नवरात्रों में दुर्गा माँ के नौ रूप सदा हमारे आस पास रहते है | नारी शक्ति के प्रतिक है माँ दुर्गा के नौ रूप | नवरात्रों में कन्या पूजन का बहुत ही महत्व है | कन्या पूजन के बाद ही नवरात्रों को पूरा माना जाता है | यदि नवरात्रि के वर्त रखे हो तब तो कन्या पूजन बहुत ही जरुरी हो जाता है |  नवरात्रों में कई लोग अष्टमी पूजते है और कई लोग नौमी पूजते है और कन्या पूजन करते है | अपने घर में छोटी छोटी कन्याओ को बुलाते है और उन कन्याओ के रूप में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते है | 

कैसे की जाती है कन्या पूजा

अष्टमी या नौवे नवरात्र में नौ कन्याओ को घर में लाते है और ये माना जाता है कि उन नौ कन्याओ में माँ दुर्गा के नौ रूप है | कन्याओ की उम्र ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक होनी चाहिए| ऐसा माना जाता है कि छोटे बच्चो में भगवान का वास होता है क्युकी छोटे बच्चे हर गंदगी से दूर होते है, उनमे ना छल होता है, ना ही कपट होता है | छोटे बच्चे भगवान की तरह पवित्र होते है | इसीलिए छोटी उम्र की कन्याओ को पूजा जाता है | पहले कन्याओ के पैर धोए जाते है, मन में ये धारणा रहती है जैसे माँ के ही पैर धोए जा रहे है | कन्याओ को एक स्थान में बैठाते है और उनको तिलक लगाते है | हाथो में पवित्र मोली बांध कर, उन कन्याओ की पूजा करते है और माँ की जय जयकार करते है | कन्याओ को हलवा, पूरी और बिना प्याज और लहसुन की सूखे काले छोले की सब्जी का भोग लगाया जाता है | छोटी छोटी कन्याओ को खुश करने के लिए उन्हें चूड़िया, कपडें, पैसे और मिठाईयां दी जाती है | छोटी छोटी कन्याओं के मुस्कुराते चहरो से ऐसा लगता है जैसे माँ दुर्गा के नौ रूप ख़ुशी से हंस रहे हो | कन्या पूजन के समय खुद ये कन्याए भी माँ की जय जय कार करती है | घर में हर तरफ माँ की जय जय कार ही सुनाई देती है | कन्याओ को खिलाने के बाद उनके पैर छू कर आशीर्वाद लिया जाता है | लेकिन ऐसा माना जाता है कि नौ कन्याओ के साथ एक लड़के की भी पूजा कर के ही पूजा पूरी होती है |

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कन्या पूजन में एक लड़के का होना क्यों जरुरी है

कन्या पूजन में नौ कन्याओ के साथ साथ एक लड़के का होना भी बहुत जरुरी होता है | इस लड़के को लंगूर कहा जाता है | कन्याओ के साथ साथ, एक लड़के को भी पूजा जाता है | ऐसा कहा जाता है कि कन्या पूजन के समय एक लड़का जिसे हनुमान जी माना जाता है, होना बहुत जरुरी है, तभी पूजन पूरी मानी जाती है | जिस तरह माँ वैष्णो के दर्शन के बाद भैरो के दर्शन करने से ही दर्शन पुरे माने जाते है | ठीक उसी तरह, नौ कन्याओ के साथ एक लड़के (लंगूर) की भी पूजा करने से कन्या पूजन पूरा होता है |

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