जन्माष्टमी – अच्छाई की शुरुआत

Janmashtmi

जन्माष्टमी  (Janmashtmi)

हिन्दू धर्म के अनुसार ये माना जाता है कि जब जब इस धरती में पाप बढेगा तब तब इस धरती में देवता जन्म लेंगे उस पाप को दूर करने के लिए | ये भारत देश का सोभाग्या ही था कि श्री कृष्ण ने इस धरती में जन्म लिया और श्री कृष्ण के जन्म से ये धरती पावन हो गई | श्री कृष्ण ने अपने कई रूप दुनिया को दिखाए और उन के सभी रूपों से पूरी दुनिया मोहित हो गई | चाहे वो एक नटखट पुत्र या फिर एक प्यारा प्रेमी या फिर भाई भाई का अटूट प्यार, श्री कृष्ण ने हर रूप, हर रिश्ते को बह्खुबी निभाया | श्री कृष्ण ने मस्ती भी करी और माँ यशोदा का प्यार भी पाया, भाई से मनमानी भी करी और भाई की आज्ञा का पालन भी करा | गोपियों का दिल भी लगाया और उनका सम्मान भी किया | हर रूप में श्री कृष्ण की जय जय कार हुई| बिना किसी स्वार्थ से हर किसी के साथ रिश्ता निभाया और दुनिया से बुराई को दूर किया | जन्माष्टमी श्री कृष्ण के जन्म की ख़ुशी में पूरे भारत में बहुत ही ख़ुशी से मनाई जाती है | आए जाने क्या कहानी है जन्माष्टमी के पीछे |

कहानी कृष्ण के जन्म की – Story about Krishan birth

श्री कृष्ण के आने की पूर्व घोषणा हो चुकी थी

जब धरती में पाप बहुत बड गया और कंस का अत्याचार हद से ज्यादा बड गया तब सभी देवी देवता श्री विष्णु के पास गए तब श्री विष्णु योग में लीं थे, सभी की पुकार सुन कर श्री विष्णु जब जागे, तब उन्होंने सब के आने का कारण पूछा | धरती माता ने अपनी साड़ी परेशानिया उनको बताई तब श्री विष्णु ने ये घोषणा कि वे मथुरा में वासुदेव जानकी के यहाँ जल्द ही जन्म लेंगे |

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कंस की क्रूरता की वजह से हुआ श्री कृष्ण का जन्म

कंस बहुत ही क्रूर था वो इतना क्रूर था कि उसने अपने ही पिता राजा उग्रसेन को कारावास में डाल दिया था और उनका राज्य भी हथिया लिया था | कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह यादव वंश के वासुदेव से कर दिया था | देवकी के विदाई के वक़्त ये भविष्यवाणी हुई कि देवकी का आठवा पुत्र कंस की मृत्यु का कारण बनेगा | कंस अपनी बहन से बहुत प्यार करता था पर इस भविष्यवाणी को सुन कर कंस अपनी बहन देवकी को मारने के लिए भी तैयार हो गया | ये सब देख के वासुदेव ने कंस से वादा किया कि वे अपने आठवी संतान कंस को सोंप देंगे | कंस ये सुन कर मान ही गया था कि नारद मुनि ने कंस से कहा कि गिनती की शुरुआत तो कही से भी शुरू हो सकती है | ये बात सुन कर कंस ने अपनी बहन और उसके पति को कारावास में डाल दिया और एक एक कर के उनके सात पुत्र संतान को मार डाला | देवकी के गर्भ से भाद्र पद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में स्वयं भगवान कृष्ण ने जन्म लिया। वासुदेव को भविष्यवाणी हुई कि इस पुत्र को जल्दी से ब्रजधाम पहुचाओ और नन्द के यहाँ जिस पुत्री का जन्म हुआ है उस पुत्री को यहाँ इस स्थान में रख दो | वासुदेव और जानकी समझ गए कि ये कोई मामूली इन्सान नहीं है बल्कि स्वयं विष्णु के अवतार है | श्री कृष्ण के महिमा से राज्य के सारे सिपाही सो गए और भवन के सारे दरवाजे अपने आप खुल गए | वासुदेव बाल कृष्ण को सूप में रख कर बरसते पानी में गोकुल धाम ले गए | शेषनाग ने वासुदेव की रक्षा की | यमुना को पार करते वक़्त यमुना ने श्री कृष्ण के पैर को छूने की इच्छा से अपने पानी का स्तर ऊचा और ऊचा कर लिया, जब पानी का स्तर वासुदेव के सर तक पहुच गया तब श्री कृष्ण ने अपने पैर निचे लटका के यमुना को अपने पैर पैर छूने की अनुमति दी | यमुना ने बाल श्री कृष्ण के पैर छू कर, वासुदेव को आगे जाने का रास्ता दिया | गोकुल पहुच कर वासुदेव ने यशोदा के पास राखी कन्या को उठा लिया और यशोदा के पास बाल श्री कृष्ण को रख दिया | जाते जाते वासुदेव ने बाल रूप श्री कृष्ण को देखा और उनकी आंखे भर आई | वासुदेव उस कन्या को लेके वापिस कारावास में चले गए | वासुदेव के कारावास में पहुचते ही सरे पहरेदार जाग गए और फिर कंस को संतान के होने की सुचना दी | कंस ने आ कर देवकी से कन्या को छिना और उसे पटक के मारना चाह लेकिन कन्या आसमान में उड़ गई और उसने माता का रूप धारण कर लिया | माता हंस के बोली –ओह मुर्ख, तेरा काल तो गोकुल पहुच चुका है |

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