फेंग शुई क्या है – घर में अच्छी फेंग शुई कैसे लाए

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फेंग शुई क्या है

चीन की वास्तुकला का नाम फेंग शुई है | वास्तु का अर्थ है वह स्थान जहा देवता और इंसान दोनों का निवास हो | दोनों का निवास होने से अत्यंत सुख का अनुभव होता है | फेंग शुई की उत्पति चीन में हुई इसका मतलब ये नहीं की सिर्फ बौद्ध धर्म के लोग ही उठा सकते है | फेंग शुई का लाभ किसी भी धर्म के लोग उठा सकते है | फेंग शुई का सिद्धन्त इन्सान को सुख प्रदान करता है |

फेंग शुई क्या है

फेंग शुई का अर्थ हवा और पानी है | हवा और पानी का सही संतुलन ही फेंग शुई है | हवा जो मन्द मन्द बहती हो, जिसके बहने से सुख का एहसास हो और पानी जो निर्मल हो और स्वच्छ हो | फेंग शुई में पानी को धन की संज्ञा दी जाती है |

वास्तुशास्त्र में निगेटिव एनर्जी को पॉजिटिव (positive) जिसे आप वास्तु दोष के नाम से जानते है, कई बदलाव करने होते है, उसके लिए तोड़ फोड़ करनी होती है | मगर फेंग शुई में निगेटिव एनेर्गी को पॉजिटिव करने के लिए कुछ वस्तुओ का सहारा लिया जाता है जो तोड़ फोड़ की अपेक्षा काफी सस्ती पड़ती है |

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जल, पृथ्वी, लकड़ी, अग्नि, धातु इस पांच तत्वों का पॉजिटिव सर्किल (Positive circle) ही फेंग शुई की रचना है | फेंग शुई के अनुसार भाग्य को तीन काल में बाटा गया है

  1. भूत काल भाग्य – स्वर्ग से प्राप्त भाग्य | भूत काल भाग्य को बदला नहीं जा सकता |
  2. वर्तमान भाग्य – मनुष्य के कर्म से प्राप्त भाग्य | ये भाग्य मनुष्य के कर्मो पर निर्भर करता है |
  3. भविष्य काल भाग्य – पृथ्वी से प्राप्त भाग्य | इस भाग्य में हम पृथ्वी से प्राप्त स्थान वातावरण, घर, दुकान, दिशा में बदलाव ला के, उसे अपने पक्ष में मोड़ सकते है |

फेंग शुई का अर्थ ये ही है कि वातावरण को अपने पक्ष में मोड़ कर सुख,समृद्धि और सोभाग्य को लाना

बुरी फेंग शुई क्या है

बुरी फेंग शुई का अर्थ हवा और पानी का असंतुलन है | बुरी फेंग शुई में हवा और पानी विनाश कारी होता है | जब पानी काफी तेज़ बहे और बाढ़ में बदल जाए तो ये विनाशकारी हो जाता है | यदि हवा तूफ़ान में बदल जाए तो ये भी विनाशकारी हो जाता है | एसी परिस्थिति में धन, संपदा, जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है |

जमीन के अभाव के कारण लोग दिशा का ध्यान ना देके किसी भी दिशा में अपना घर बना रहे है | गलत दिशा का इस्तेमाल करने से बुरी फेंग शुई आती है | बुरी फेंग शुई का प्रवेश घर के अन्दर, घर की सरचना और अनावश्यक वस्तुओं को रखने से भी होता है | वस्तुओं को गलत दिशा रखने से भी बुरी फेंग शुई का प्रवेश होता है |

बुरी फेंग शुई प्रवेश करने के कुछ उदाहरण –

  1. मकान के मुख्य दरवाजे के आगे शोचालय या रसोईघर का दरवाजा होना |
  2. मकान के मुख्य दरवाजे के आगे दीवार या खम्बा होना |
  3. सोने वाले स्थान के ऊपर बीम होना |
  4. मुख्य दरवाजे के आगे के आगे दर्पण होना |
  5. अलमारी का दरवाजा खुला रखना |
  6. सूखे फलो को घर में रखना |
  7. शयन कक्ष (bed room) में मछली घर होना |
  8. झाड़ू को खुली जगह रखना |
  9. फर्नीचर का तिकोना होना |
  10. चाक़ू, कैंची खुले रखना |
  11. टूटे हुए शीशे घर में रखना |
  12. दरवाजे के सामने सर या पैर कर के सोना |

ची क्या है

ची ब्रहम्मांड की उर्जा है जो शरीर की जीवन शक्ति है इसे पुरे ब्रहम्मांड की श्वास कहते है | ची जीवन और मृत्य का संगम है | ची दो प्रकार की होती है जीवित ची और मृतक ची | जीवित ची सुखदाई होती है और मृतक ची दुखदाई होती है | ची का प्रवेश जिस दरवाजे से होता है वे उस दरवाजे से बाहर नहीं जाती है अन्य जगह से जाती है | जिस जगह ची के प्रवेश करने की जगह हो निकलने की नहीं, जिस जगह एक ही दरवाजा हो उस जगह बुरी ची का निवास होता है | यदि एक सीध में एक साथ दो या तीन दरवाजे हो वहा मृतक ची प्रभाव शाली हो जाती है |

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यिन और यांग

मृतक ची को यिन कहते है | जीवित ची को यांग कहते है | यिन और यांग के संगम को ची कहते है | काला रंग यिन का प्रतीक है और सफ़ेद रंग यांग का प्रतीक है | यिन और यांग का संतुलन इंसान के लिए सुखदाई है | यिन और यांग का संतुलन में रहना ही फेंग शुई है | पानी यांग उर्जा का प्रतीक है और हवा यिन उर्जा का प्रतीक है |

लो शू चमत्कारी वर्ग क्या है – लो शू चमत्कारी वर्ग से बदले अपनी किस्मत

आज से लगभग 5000 साल पहले चीन में इस चमत्कारी वर्ग की खोज हुई थी | माना जाता है कि चीन में पीली नदी में से एक विशाल कछुआ प्रकट हुआ जिसके खोल पर 3 * 3 का वर्ग अंकित था जिसमे बिंदिया थी और सभी तरफ से योग करने से 15 आता था | इस से लो शू वर्ग कहा गया | लो शू वर्ग में 1 से 9 तक के अंक का इस्तेमाल हुआ है | फेंग शुई में लो शू चमत्कारी वर्ग को दुकान और व्यापारिक जगह पर रखना बहुत शुभ मानते है |

फेंग शुई के अनुसार विभिन्न कमरों की दिशा

  1. ड्राइंग रूम – ड्राइंग रूम में खिड़किया बाहर खुलनी चाहिए और खिडकिया बड़ी होनी चाहिए | इस रूम में सोफे के पीछे खिड़की और दरवाजे नहीं होने चाहिए | इस रूम में एक्वेरियम रखा जा सकता है |
  2. बैड रूम – इस रूम में पलंग किनारे लगाना चाहिए | पलंग पर सोते समय पैर और सर दरवाजे की तरफ नहीं होना चाहिए | पलंग पर सूर्य की रोशनी सीधी नहीं पड़नी चाहिए | पूर्व दिशा का बैड रूम बच्चो के लिए और पश्चिम दिशा का बैड रूम बड़ो के लिए सही है | पलंग के सामने ड्रेसिंग टेबल और आइना नहीं होना चाहिए | हलकी एवम सुखद रोशनी का टेबल रख सकते है |
  3. रसोई घर – फेंग शुई के अनुसार रसोई घर पूर्व या दक्षिण दिशा में होनी चाहिए | रसोई घर दरवाजा छोटा होना चाहिए | रसोई घर प्रवेश दरवाजा के सामने नहीं होना चाहिए | खाना बनाते समय दरवाजे की तरफ पीठ नहीं होनी चाहिए यदि एसा है तो रसोई में आइना रखना चाहिए | आइना इस तरह लगाए की हमें आने वाला दिखाई दे | दो अलग तत्व अग्नि और पानी एक साथ नहीं होने चाहिए | चूल्हा और फ्रिज भी साथ साथ नहीं होने चाहिए | माइक्रोवेव और सिंक साथ नहीं होने चाहिए |
  4. शोचघर और स्नानघर – ये दोनों ही रसोईघर और भोजन रूम से दूर होना चाहिए | इसकी दिशा उत्तर पूर्व या उत्तर पश्चिम अच्छी मानी जाती है | इसके दरवाजे छोटे होने चाहिए | घर में प्रवेश करते ही शोच घर और स्नानघर दिखना अच्छा नहीं होता है | शोच घर कभी भी दक्षिण पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए | इसमें धन का नुकसान होता है | अगर शोच घर पश्चिम दक्षिण दिशा में है तो इससे वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है |
  5. फेंग शुई के अनुसार टूटे हुए शीशे नहीं होने चाहिए |
  6. खाली दीवार की तरफ मुह करके ना बैठे | दीवार पर कोई प्रेरणादायक चित्र जरुर लगाए |
  7. तिकोने पहाड़ का चित्र घर में नहीं होने चाहिए |
  8.  झाड़ू और पोछा घर में छुपा के रखने चाहिए | इन्हें खुले में न रखे | कूड़ेदान को भी छुपा कर रखे
  9. पुराणी वस्तुओ को संभाल के न रखे | डूबते हुए जहाज का चित्र घर में नहीं रखना चाहिए |

 

 

 

 

 

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