नौ दिन बस माँ के साथ – आओ मनाए नवरात्रि साथ

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दुर्गा माँ के नौ रूप  – माँ को पसंद है ये नौ भोग

नवरात्रि भारत में हर घर में बहुत ख़ुशी और पूजा पाठ के साथ मनाई जाती है | नवरात्रि के नौ दिन जैसे भगतो के लिए उपहार के दिन होते है | इन नौ दिनों में हर घर से बस माँ की जय जय कार ही सुनाई देती है | नवरात्रि के नौ दिन देवी माँ को पूजा जाता है और नौ दिन उपवास रखा जाता है| नवरात्रि के उपवास में अन्न नहीं खाया जाता| नवरात्रि में दुर्गा माँ के नौ रूपों का पूजन होता है| नवरात्रि के हर एक दिन में माँ दुर्गा के एक रूप की आराधना होती है और उस दिन उस रूप के मन पसंद चीजों का ही भोग लगता है | सभी माँ की भक्ति में डूबे होते है | नवरात्रि के एक दिन पहले से सब घरो में मंदिर की सफाई होती है | माँ को नए जोड़े में सजाया जाता है | आए जाने माँ के नौ रूपों के बारे में | आए जाने, नवरात्रि में किस दिन किस चीज़ का भोग लगाने से आप पर हो सकती है माँ की कृपा |

दुर्गा माँ के नौ रूप

शैल – पुत्री

शैल – पुत्री को पर्वत की बेटी भी कहा जाता है | शैल पुत्री नौ रूपों में से पहला रूप है | शैल पुत्री हिमालय पर्वत की पुत्री है | पिछले जन्म में शैल पुत्री राजा दक्ष की पुत्री थी, उनका नाम सती था और इनका विवाह भोले बाबा से हुआ था | राजा दक्ष ने एक बार अपने महल में यज्ञ का आयोजन किया था पर उस यज्ञ में अपने जमाई शिव शंकर को नहीं आमंत्रित किया था | माँ सती अपने पति का ये अपमान सहन ना कर सकी और अपने पिता के महल उनसे इस विषय में बात करने गई | लेकिन वहा जाके भी उन्हें अपमान ही मिला और वह यज्ञ की अग्नि में कूद गई | अगले जन्म में सती माँ शैल पुत्री के रूप में जन्मी |

माँ शैल – पुत्री का भोग

माँ शैल – पुत्री को सफ़ेद चीजों का भोग लगता है | माँ शैल – पुत्री को सफ़ेद रंग की चीजों का भोग लगाने से रोग दूर होते है |

भ्रमाचारिणी

भ्रमाचारिणी रूप माँ दुर्गा का शांति का प्रतिक रूप है | भ्रमाचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली | माँ दुर्गा का ये दूसरा रूप भ्रमाचारिणी सबसे सुंदर रूप है | भ्रमाचारिणी माँ के दाहिने हाथ में गुलाब और दुसरे हाथ में पानी का बर्तन है | पार्वती माँ हिमालय की बेटी थी, वह बगीचे में अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी तभी वहा नारद मुनि आते है और भविष्य वाणी करते है कि पार्वती की शादी भोले बाबा से होगी लेकिन इस के लिए उन्हें बहुत तप करना होगा |  पार्वती माँ के मन में भोले बाबा को पति के रूप में पाने की इसी अलक जगी और उन्होंने भोले को पाने के लिए तपस्या शुरू कर दी | कई वर्षो तक उन्होंने तपस्या की और सिर्फ सूखे हुए पत्ते खा के अपनी तपस्या जारी रखी | कुछ वर्षो बाद तो उन्होंने सूखे पत्ते भी खाना छोड़ दिया | बारिशे हो या धुप हो, उन्होंने हर हाल में तप किया | सभी देवता गण उनसे खुश हुए और उन्हें वरदान दिया कि उनका विवाह भोले बाबा से ही हो | उन्होंने इतना तप किया तभी उनका नाम भ्रमाचारिणी पड़ गया |

भ्रमाचारिणी माँ नवरात्रि के दुसरे दिन पूजी जाती है | माँ भ्रमाचारिणी की कृपा से सिद्धि प्राप्त होती है|

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भ्रमाचारिणी माँ का भोग

भ्रमाचारिणी माँ को मीठी चीजों का भोग लगता है | भोग के रूप में मिश्री, चीनी और पंचामृत अर्पित किया जाता है | भ्रमाचारिणी माँ को खुश करके लम्बी उम्र का वरदान भी पाया जा सकता है |

चन्द्रघंटा

चन्द्रघंटा दुर्गा माँ का तीसरा रूप है | नवरात्रि में तीसरे दिन माँ चन्द्रघंटा की पूजा होती है | चन्द्रघंटा माँ का पूरा शरीर सोने की तरह चमकीला है | इनके माथे में आधा चाँद घंटे के रूप में बना हुआ है इसीलिए इन्हें चन्द्रघंटा के नाम से जाना जाता है | इनके दस हाथ है और इन्होने अस्त्र और शस्त्र धारण किये हुए है | यह सिंह पे सवार है | इनके घंटे की आवाज़ से दानवो का नाश हो जाता है |

माँ चन्द्रघंटा का भोग

माँ चन्द्रघंटा को दूध बहुत पसंद है | माँ चन्द्रघंटा को दूध से बनी चीजो का ही भोग लगाया जाता है | ऐसा करने से भगतो के सभी दुःख ख़त्म हो जाते है |

कूष्माण्डा

कूष्माण्डा दुर्गा माँ का चौथा रूप है | यह रूप ख़ुशी का प्रतिक है | नवरात्रि के चौथे दिन कूष्माण्डा माँ को पूजा जाता है | अपनी मोहक हंसी के कारण कूष्माण्डा माँ जानी जाती है | ऐसा कहा जाता है कि जब चारो तरफ अंधकार ही अंधकार था तब कूष्माण्डा माँ ने अपनी मोहक मुस्कान से ही पुरे ब्रह्माण्ड की रचना की थी | कूष्माण्डा माँ की आठ भुजाए है जिनमे से सात भुजाओ में अलग अलग प्रकार के अस्त्र है और आठवे हाथ में माला है | कूष्माण्डा माँ की आराधना से रोगों और शोको का नाश होता है |

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कूष्माण्डा माँ का भोग

कूष्माण्डा माँ को मालपुए का भोग लगा के, उसे ब्राह्मण और गरीबो में बाट दे और प्रसाद के रूप में थोडा खुद भी सेवन करे |

स्कंदमाता

स्कंदमाता माँ दुर्गा का पांचवा रूप है | नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता माँ की आराधना की जाती है | स्कंदमाता माँ की चार भुजाए है | अपने दाहिने तरफ के दो भुजाओ में माँ ने अपने बेटे स्कंद और कमल का फुल लिया हुआ है और दूसरी तरफ के भुजाओ में कमल का फुल लिया हुआ है | माँ कमल के पुष्प में विराजमान है और सिहं की सवारी करती है | स्कंदमाता आग की देवी है |

स्कंदमाता माँ का भोग

स्कंदमाता माँ को केले का भोग लगाया जाता है | भोग लगाने के बाद ब्राह्मण और गरीबो में बाट देना चाहिए |

कात्यायनी

कात्यायनी माँ दुर्गा माँ का छठा रूप है | नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना की जाती है | एक बहुत ही महान महर्षि कात्यायन ने माँ के लिए बहुत कठोर तप किया था | उन्होंने ये तप पुत्री के रूप में माँ उनके घर जन्म ले इसीलिए किया था | माँ उनके तप से प्रसन्न हुई और कात्यायनी के रूप में उनके घर जन्म लिया | माँ स्वर्ण के जैसी चमकीली है | कात्यायनी माँ की आराधना करने से जन्मो जन्मो के पाप नष्ट हो जाते है |

कात्यायनी माँ का भोग

कात्यायनी माँ को मधु का भोग लगाया जाता है | मधु दान करने से सुंदर रूप की प्राप्ति होती है |

कालरात्रि

कालरात्रि रूप दुर्गा माँ का सातवा रूप है | नवरात्रि के सातवे दिन कालरात्रि माँ की आराधना की जाती है | कालरात्रि माँ के नाम से ही सारे दानव थर थर कापते है | कालरात्रि माँ काल से भी रक्षा करती है | कालरात्रि माँ के बाल भिखरे हुए है | यह तीन आँखों वाली देवी है | उनके हर सास से हजारो आग की लपटे निकलती है | कालरात्रि माँ शव की सवारी करती है | माँ की दाहिनी तरफ की भुजाए भगतो को वर देती है और सदा निडर रहने का आशीर्वाद देती है | बायीं तरफ की भुजाओ में लोहे का कांटा और खडग है |

कालरात्रि माँ का भोग

कालरात्रि माँ को गुड का भोग लगाया जाता है | गुड का दान करने से शोक मुक्त होते है |

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महागौरी

महागौरी दुर्गा माँ का आठवा रूप है | नवरात्रि के आठवे दिन माँ महागौरी की आराधना की जाती है | यह दुर्गा माँ करूप पवित्रता का प्रतीक है | माँ की आयु आठ साल की है | इनके सारे वस्त्र और आभूषण सफ़ेद रंग के है | माँ की चार भुजाए है | माँ का सवारी वृषभ है | माँ ने त्रिशूल और डमरू अपने हाथो में लिया हुआ है | माँ की मुद्रा शांत है | माँ ने शिव को पाने के लिए बहुत तप किया जिस से इनका पूरा शरीर काला हो गया था | शिव जी ने माँ की तपस्या से प्रसन्न हो ने के बाद, उनको गंगा के पानी से नहलाया था जिस से माँ का शरीर गोर वर्ण का हो गया था |

महागौरी का भोग

महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है |

सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री दुर्गा माँ का नौवा रूप है | नवरात्रि के नौवे दिन सिद्धिदात्री माँ की आराधना की जाती है | यह माँ दुर्गा का सबसे ज्ञानी रूप है | सिद्धिदात्रीमाँ की कृपा से ही शिव जी ने सारी सिद्धियां प्राप्त की थी | माँ की कृपा से ही शिव जी का आधा शरीर देवी का हुआ था | अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां होती हैं। इसलिए इस देवी की सच्चे मन से विधि विधान से उपासना-आराधना करने से यह सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। माँ की चार भुजाए है | दाहिनी तरफ की भुजाओ में चक्र और गदा है और दूसरी तरफ की भुजाओ में शंक और कमल है |

सिद्धिदात्री माँ का भोग

सिद्धिदात्री माँ को विभिन्न प्रकार के अनाजो का भोग लगाया जाता है | हलवा, पूरी, खीर का भोग लगाया जाता है |

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