सरदार वल्लभ भाई पटेल – जीवनी और निबंध

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Biography of Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले एसे बुजुर्ग जो लोहा पुरुष के नाम से जाने जाते है |  लोहा पुरुष के नाम से जानने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल एकता के प्रतीक माने जाते है | सभी रियासतों को एक कर के भारत को एक रूप में ढालने का पूरा क्षरे सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है |   भारत की आज़ादी से पहले भी और बाद में भी जिन्होंने अहम भूमिका निभाई उनका नाम है सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन की जानकारी  

जन्म : 31 अक्टूबर 1875                                       मृत्यु : 15 दिसम्बर 1950

जन्म स्थान : नाडियाड – गुजरात                           मृत्यु स्थान :  बॉम्बे                       

माता/पिता का नाम : लाड़ भाई और झावर भाई         विवाह की तिथि : 1893         

पत्नी का नाम : झवेर भाई                       बच्चो का नाम : मणिबेन (बेटी ) और दह्याभई (बेटा)

किसान के परिवार में जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल, अपने चार बहन भाइयो में से एक थे | बचपन से ही वो मिट्टी के करीब थे | परिवार और गरीबी दोनों ने इनकी परवरिश करी | सरदार वल्लभभाई पटेल को बचपन से ही पढ़ने का बहुत शौक था मगर उनका परिवार काफी गरीब था | सरदार वल्लभभाई पटेल के पढ़ने की इच्छा देख कर उनके पिता ने गरीब हो कर भी उन्हें पढ़ाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी | सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1896 में हाई स्कूल पास किया | अब उनके पिता उनको कॉलेज भेजना चाहते थे मगर घर की हालत के कारण उन्होंने कॉलेज ना जाने का फैसला किया और घर में ही रह कर जिला के नेता की परीक्षा की तैयारी करने लगे | तीन साल बाद 1900 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने ये परीक्षा अपनी मेहनत से पास कर ली जिसकी वजह से उन्हें वकालत करने की अनुमति मिली और उन्होंने गोधरा में वकालत करनी शुरू कर दी | उनका वकालत का काम काफी अच्छा चल रहा था |

काम के प्रति निष्ठा रखते थे सरदार वल्लभभाई पटेल

1893 में सरदार वल्लभभाई पटेल का विवाह झवेर भाई से हुआ था | 1909 में झवेर भाई की मृत्यु हो गई थी | जब इनकी मृत्यु की खबर सरदार वल्लभभाई पटेल तक एक तार के जरिये पहुचाही गई तब सरदार वल्लभभाई पटेल कोर्ट में केस लड़ रहे थे | सरदार वल्लभभाई पटेल ने तार को पढ़ा और फिर सामान्य भाव से उस तार को अपनी जेब में रख दिया | कुछ घंटो तक केस चला और अंत में सरदार वल्लभभाई पटेल इस केस को जीत गए | जब सब को इस बात का पता चला तो सबने सरदार वल्लभभाई पटेल से उनके इस बर्ताव के बारे में जानना चाह तब उन्होंने कहा उस समय में अपना कर्तव्य निभा रहा था | वो कर्तव्य जिसकी मै रकम ले चूका था और मुझे जीत के रूप में उस रकम का हक़ अदा करना था | जीत के बाद मैंने वो हक़ अदा कर दिया |

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वे वकालत की पढाई करने के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे मगर उन्होंने पहले अपने बड़े भाई को इंग्लैंड भेजा वकालत के पढाई के लिए फिर उनके वापिस आने के बाद खुद इंग्लैंड 1910 में गए और अपनी पढाई आधे समय में ही पूरी कर के प्रथम रैंक भी हासिल किया जिसके वजह से उन्हें कॉलेज के तरफ से इनाम भी मिला | 1913 में भारत वापिस आके अहमदाबाद में उन्होंने फिर से वकालत का काम शुरू कर दिया था | 1917 में अहमदाबाद से सरदार वल्लभभाई पटेल ने सैनिटेशन कमिशन का चुनाव लड़ा और उसमे जीते भी | 1917 से ही सरदार वल्लभभाई पटेल गांधी जी के सम्पर्क में आए | सरदार वल्लभभाई पटेल को गांधी जी (मोहन करमचन्द्र गांधी) की विचार धारा बहुत ही प्रभावित करती थी | गांधी जी के कदम चिन्हों पर चलते हुए उन्होंने अपने पहनावे में बदलाव किया और किसानो की तरह सफ़ेद कपड़े पहनने लगे |

खेड़ा सत्याग्रह  – नो टैक्स आंदोलन

1918 में खेडा जिले में भारी वर्षा होने के कारण वहा की फसले बरबाद हो गई थी | लेकिन फिर भी बॉम्बे सरकार किसानो से साल का पूरा कर वसूलना चाहती थी | सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस बात के लिए सरकार का विरोध किया | सरदार वल्लभभाई पटेल ने सरकार का कड़ा विरोध किया और खेडा जिला के किसानो के साथ मिल कर उन्होंने इस संघर्ष के लिए कदम आगे किया | इस संघर्ष में सरदार वल्लभभाई पटेल को जीत हासिल हुई और 1919 में सरकार ने किसानो का कर माफ़ कर दिया | इस जीत के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की छवि राष्ट्रीय नायक के रूप में उभर गई | इस प्रकार उन्होंने अपने सफल वकालत के पेशे को छोड़ सामाजिक जीवन में प्रवेश किया। खेड़ा सत्यग्रह के बाद बारदोली सत्यग्रह में भी इनको जीत हासिल हुई जिसके बाद गांधी जी इनको किंग ऑफ़ बारदोली कहने लगे |

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जेल यात्रा

सरदार वल्लभभाई पटेल ने गाँधी जी के नमक सत्यग्रह में कंधे से कन्धा मिला कर साथ दिया जिसकी वजह से इन्हें जेल भी जाना पड़ा | 7 मार्च 1930 में सरदार वल्लभभाई पटेल को ग्रिफ्तार करके जेल में बंद कर दिया गया | कुछ महीने बाद इनको छोड़ दिया गया मगर फिर 31 जुलाई को इनको जेल में डाल दिया गया |सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान ही फिर गिरफ्तार कर जनवरी 1932 – जुलाई 1934 तक यरवदा जेल में गांधीजी के साथ कैद रखा. इसी दौरान उनके बड़े भाई विट्ठलभाई की जिनेवा के पास एक क्लिनिक में मृत्यु हो गयी. मनिबेन व कस्तुबा गाँधी को भी अल्प समय के लिए इसी जेल में रखा गया| नाक की गंभीर बीमारी कारण इन्हें जुलाई 1934 में रिहा करना पड़ा| उसके बाद कई बार सरदार वल्लभभाई पटेल जेल गए और जेल से रिहा हुए | आखिरी बार भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने पर अगस्त 1942 में अहमदनगर फोर्ट में नेहरु, आजाद व कई बड़े नेताओं के साथ इन्हें भी जेल में डाल दिया | बाद में 1945 के शुरुवात में यरवदा जेल शिफ्ट कर दिया गया | जून 1945 में शिमला वार्ता में भाग लेने हेतु जेल से रिहा करना पड़ा|

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आजादी के बाद

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री । सरदार वल्लभभाई पटेल 15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री तथा गृह, स्टेट्स, सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने | इसके अतिरिक्त वह गृहमंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण और राज्यों के मंत्रालय के प्रभारी भी थे। आजादी के बाद भारत के रजवाड़ो को शान्तिपूर्वक भारतीय संघ में शामिल करने में सरदार वल्लभभाई पटेल ने अहम भूमिका निभाई | आजादी के बाद कई महाराजा अलग राज्य की मांग करने लगे | उन्होंने सोचा भारत आजाद हो गया है अब उन्हें भी उनका राज्य शासन करने के लिए मिलेगा | तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सभी राजाओं को समझाया अलग राज्य मिलने का सपना छोड़ दे ये मुमकिन नहीं है और सभी की भलाई भारतीय गणतंत्र का हिस्सा बनने में ही है | उन्होंने अपनी मेहनत से सभी छोटे छोटे रियासतों को संगठित किया और फिर उन्होंने हैदराबाद के निज़ाम और जूनागढ़ के नवाब को काबू में किया जो प्रारम्भ में भारत से नहीं जुड़ना चाहते थे। आजादी के बाद 565 रियासतों को संगठित करके पूरे भारत को एक रूप देने का अहम काम सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने तेज़ दिमाग और अपनी मेहनत से किया | सरदार वल्लभभाई पटेल के इस ख़ास काम के लिए उन्हें लोह पुरुष नाम से नवाज़ा गया |

मृत्यु

सरदार पटेल की मृत्यु 15 दिसम्बर 1950 को ह्रदय की गति रुक जाने के कारण हुआ।

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