Best shayari of Galib – गालिब

mirzagalib

कितना खोफ होता है शाम के अंधेरे में

पुछ उन परिंदो से जिन के घर नही होते

 

गालिब शराब पीने दे मज़िद में बैठ कर

या वो जगह बता जहा खुदा नही

 

इस कदर तोडा है मुझे उसकी बेवफाई ने गालिब

अब कोई प्यार से भी देखे तो बिखर जाता हूँ मै

 

हम तो फनह हो गए उसकी आंखे देख कर गालिब

ना जाने वो आइना कैसे देखते होगा

 

हर एक बात पे कहते हो तुम कि “तू क्या है ”

तुमही कहो कि ये अंदाजे गुफतुगु क्या है

रगो में दोडते फिरने के हम नही कायल

जब आँख ही से ना टपके तो लहु क्या है

 

उन्हें देखने से जो आ जाती है मुह में रोनक

वो समझते है कि बीमार का हाल अच्छा है

 

हाथो की लकिरो में मत जा रे गालिब

नसीब उनके भी होते है जिनके हाथ नही होते

 

मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पिछे

तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे

कहते है जीते है उम्मीद पर लोग

हमको जीने की भी उम्मीद नही

 

इस सादगी में कोन ना मर जाए ऐ खुदा

लडते है और हाथ में तलवार भी नही

 

इश्क ने गालिब निकमा कर दिया

वरना हम भी आदमी थे काम के

 

जब कि तुझ बिन नही कोई मोज़ूद

फिर ये हंगामा ए खुदा क्या है

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2 thoughts on “Best shayari of Galib – गालिब”

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