बूढ़ी अम्मा की कहानी

एक अम्मा थी जो संतरे बेचती थी, उसके यहा एक आदमी आता था रोज जो उससे संतरे लेता था पर उससे संतरे लेकर वही संतरे खोल कर चखता और अम्मा से किच किच करता के संतरे सही नही है, और अम्मा चखती और कहती थी, “ठीक तो है बेटा”

इसपर वो अदमी वो संतरा जो खोला था वही छोड़ कर चला जाता, पर वो ऐसा रोज करता, एक दो दिन देखने के बाद उस अदमी कि बीबी ने बोला तुम रोज ऐसा क्यू करते हो बेचरी अम्मा को क्यू परेशान करते हो संतरे तो ठीक होते है फिर तुम उससे किच किच क्यू करते हो, तो उस अदमी ने बोला के वो अम्मा बहुत गरीब है और संतरे बेचती तो है पर कभी खाती नही है इसलिए मै रोज एक संतरा निकाल कर वही खोलता हूँ और किच किच करके वही छोड़  देता हूँ ताकि वो अम्मा उसे खा ले,

कुछ दिन बाद रोज़ ये सब देख अम्मा की बगल वाली औरत बोली के वो आदमी रोज़ तुमसे किच किच करता है उसे तुम भगा क्यू नही देती और तुम उसे तौलने के बाद भी ज्यादा संतरे दे देती हो, तब अम्मा ने बोला के वो आदमी किच किच नही मेरी चिंता करता है और रोज़ मेरे लिए एक संतरा छोड़ जाता है ताकि मै उसे खा लू , इसी लिए मै भी उसे तौलने के बाद भी ज्यादा संतरे देती हूँ, उसकी चिक चिक में भी प्यार नजर आता है,

 

वो कहते  है  ना

“मेरे हिस्से से ज्यादा तुने मेरी थाली में परोसा है,

कितनी भी मुश्किले दे मुझे ऐ ऊपर वाले मुझे तुझपे  भरोसा है” 

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