बारिशो की यादे

barish

बारिशो का आज कल सब को इंतेज़ार है| बारिशो की मस्ती साथ में चाए और पकोडे का मज़ा ही कुछ ओर है, क्यू नाम सुनते ही आ गया ना  मुह में पानी| रसोई से गरमा गरम पकोडे कि खुशबू और वो Mumy का चिल्लाना ….आओ ले जाओ बनाऊ भी मै और पहुचाऊ भी मै  और फिर सब भाई बहनो का एक दुसरे को बोलना – जा तू ला, नही last time मै गया था अब तेरी बारी …. इतने में Mumy की आवाज़ आती है – तुम आ रहे हो कि मै आऊ फिर सब का भाग कर रसोई की तरफ़ जाना और बोलना आए Mumy | कुछ यादे हमारे ज़ेहन में हमेशा रहती है| यू तो सब आज कल अपने अपने फ़ोन में busy है पर फिर भी जो बात सब के साथ चाए पीने और खाना खाने में होती है वो बात किसी में नही | छोटी बहन को बारिश में जबरदस्ती लाना फिर उसका रोना और फिर Mumy का गुस्सा करना…. परिवार का सुख तो वो ही जाने जो परिवार के साथ रहा है | परिवार के साथ रहने में खुशिया ज्यादा है और दुःख कम पर हमारी परेशानी ये है कि हमे independent होने का जुनुन है | ज़ीवन में ऊचाई छुना अच्छी बात है पर इतनी भी ऊचाई ना हो कि जडो से नाता ही ना रहे | ज़ीवन में आगे जाना चाहिये पर अपनी जडो से भी रिश्ता निभाना चाहिए

बारिशो में मिटटी की हल्की हल्की खुशबू तो मदहोश ही कर देती है|

बहुत कमाल की है बारिश दोस्तों, कभी तो मोका देती है खुल के हसने का और कभी सहारा बनती है खुल के रोने का | बारिशो के बुंदो में हम अपने आँसू भी छुपा ले जाते है और कभी कभी बारिशो में खुल के रो भी पाते है | कभी हंसा के कभी रुला के बहुत सुकुन दे जाती है बारिशे | सच दोस्तों कितना अपना पन जताती है बारिशे |

इन बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं ‘फराज़’
कच्चा तेरा मकान है कुछ तो ख़्याल कर ।

 

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