दशहरा – बुराई पर अच्छाई की जीत

बुराई  पर अच्छाई  की  जीत

भारत में दशहरा बहुत धुमधाम से मनाया जाता है। ये मान्यता है कि आज ही के दिन श्री राम ने रावण का वध किया था। आज के दिन जगह जगह रावण के पुतले को जलाया जाता है। इस पर्व से हमे ये ज्ञान मिलता है कि बुराई कितनी ही ताकतवर क्यू ना हो पर अंत में जीत अच्छाई की ही होती है। अच्छाई की राह चलने वाले की कभी हार नही होती। दशहरा को दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार वर्षा ऋतु के अंत में संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है। नवरात्र में मूर्ति पूजा में पश्चिम बंगाल और गुजरात में खेला जाने वाला डांडिया बेजोड़ है। पूरे दस दिनों तक त्योहार की धूम रहती है। मां दुर्गा की विशेष आराधनाएं देखने को मिलती हैं। इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है।दशहरा अथवा विजयादशमी राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष, उल्लास तथा विजय का पर्व है। देश के कोने-कोने में यह विभिन्न रूपों से मनाया जाता है, बल्कि यह उतने ही जोश और उल्लास से दूसरे देशों में भी मनाया जाता जहां प्रवासी भारतीय रहते हैं।

दश  हरा एक  संस्कृत  शबद है जिसका अर्थ अपने अन्दर से दस बुराई का नाश करना  है

अहंकार

क्रोध

काम  वासना

अमानवता

अन्याय

लालच

स्वार्थ

मोह

ईर्ष्या द्वेष

गर्व से अधिक

जितनी खुशी से हम रावण के पुतले को जलाते है अगर उतनी ही खुशी से हम अपने अन्दर  के  रावण को जलाए तब ही हम दशहरा का सही अर्थ जानेंगे।

 

Truthofthoughts.com  की  तरफ़  से  आप सभी  को दशहरा  की  शुभकामनायें ……

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One thought on “दशहरा – बुराई पर अच्छाई की जीत”

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